अम्बेडकर नगर: 5390 टन चारा मछलियों ने खाया या कागजों ने ? जीएसटी विभाग भी पूछ रहा हिसाब !
मिल चली नहीं, उत्पादन दौड़ा हजारों टन! जय निषाद राज इंडस्ट्रीज का मामला पहुंचा अयोध्या मंडल, बढ़ीं धड़कनें
अम्बेडकरनगर, अचल वार्ता । जहांगीरगंज क्षेत्र के लखंडीह गांव में संचालित जय निषाद राज इंडस्ट्रीज (मत्स्य आहार परियोजना) को लेकर उठे सवाल अब सिर्फ शिकायतों तक सीमित नहीं रह गए हैं। मामला अब जीएसटी विभाग की चौखट पार कर अयोध्या मंडल तक पहुंच चुका है।
ऐसे में चर्चा यह है कि आखिर वह मत्स्य आहार मिल, जो कथित रूप से वर्षों से पूरी तरह संचालित नहीं हुई, उसने हजारों टन चारा पैदा और बेच कैसे दिया ? शिकायतकर्ता का आरोप है कि लाभार्थी रीना पत्नी साकाराज साहनी द्वारा स्थापित मत्स्य आहार मिल वर्ष 2023-24 से लेकर अब तक अपूर्णताओं के कारण नियमित रूप से संचालित ही नहीं हुई। इसके बावजूद विभाग को उपलब्ध कराए गए विवरण में दावा किया गया कि मिल ने 29 मार्च 2024 से 1 सितंबर 2024 तक 3330 टन तथा 2 अगस्त 2025 से 19 जनवरी 2026 तक 2060 टन मत्स्य आहार का उत्पादन और विक्रय किया यानी कुल 5390 टन उत्पादन का आंकड़ा प्रस्तुत किया गया। यहीं से सवालों का जाल शुरू हो गया। गांव में लोग मजाक में पूछ रहे हैं कि "जब मशीनें आराम फरमा रही थीं तो क्या चारा सपनों में बन रहा था ?" और "मछलियां तालाब में थीं या सीधे कागजों पर तैर रही थीं?"
शिकायत में कच्चे माल की खरीद में कथित जीएसटी अनियमितता का भी आरोप लगाया गया। बताया गया कि जांच के दौरान जीएसटी अधिकारियों ने कच्चे माल की खरीद से जुड़े दस्तावेज और अभिलेख मांगे, लेकिन कथित रूप से अपेक्षित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए।
उपायुक्त राज्य कर, अम्बेडकरनगर सुनील कुमार सिंह ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि शिकायतकर्ता द्वारा में० जय निषाद राज इंडस्ट्रीज, GSTN-09ESNPR9136R1ZC के विरुद्ध कर अपवंचन की शिकायत की गई थी।
जांच के दौरान शिकायतकर्ता को सूचित किया गया कि संबंधित फर्म केंद्रीय क्षेत्राधिकार में आती है, इसलिए मामले के निस्तारण हेतु शिकायत को दिनांक 02 जून 2026 के पत्र के माध्यम से केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर कार्यालय को प्रेषित कर दिया गया है। अब यह मामला अयोध्या मंडल तक पहुंच चुका है।
जिले में चर्चा है कि फाइलें भी अब उतनी ही तेजी से दौड़ रही हैं, जितनी तेजी से कागजों पर मत्स्य आहार उत्पादन का आंकड़ा दौड़ा था। लोगों की निगाहें अब मंडलीय अधिकारियों की जांच पर टिकी हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर मिल वास्तव में पूरी क्षमता से संचालित नहीं हुई, तो 5390 टन उत्पादन का दावा किस आधार पर किया गया? और यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है, तो जांच में दस्तावेज सामने आने के बाद तस्वीर साफ हो जाएगी।
अब देखना दिलचस्प होगा कि जांच की जाल में सिर्फ मछलियां फंसती हैं या फिर बड़े-बड़े सवालों के जवाब भी बाहर निकलकर आते हैं। आखिरकार, इस कहानी में चारा सिर्फ मछलियों का नहीं, बल्कि जांच एजेंसियों की दिलचस्पी का भी बन चुका है।
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