अम्बेडकर नगर : ₹2.36 लाख के भुगतान की आख्या पर बड़ा सवाल!
- खाते में रकम नहीं पहुँची तो NEFT हुआ कैसे? अधिशासी अधिकारी की रिपोर्ट ने खोल दिए कई सवाल
अम्बेडकरनगर, अचल वार्ता। नगर पंचायत अशरफपुर किछौछा में ठेकेदार की ₹2,36,900 की प्रतिभूति धनराशि के भुगतान को लेकर मामला अब सिर्फ भुगतान का नहीं, बल्कि सरकारी कागजों और बैंक रिकॉर्ड के बीच तालमेल का बनता नजर आ रहा है। मजेदार बात यह कि कागज कह रहे हैं—NEFT से भुगतान हो गया जबकि शिकायतकर्ता का सवाल है—“भाई साहब, रकम खाते में पहुँची कब मामले में अधिशासी अधिकारी उमेश पासी की ओर से दी गई आख्या के मुताबिक ठेकेदार मो. दानिश की ₹2,36,900 की प्रतिभूति धनराशि चेक संख्या 401516 दिनांक 10 सितंबर 2026 के माध्यम से उनके खाते में NEFT द्वारा अंतरित किए जाने की बात कही गई है। इसी आधार पर शिकायत के निस्तारण का दावा भी किया गया। लेकिन यहीं से कहानी में ‘NEFT का नया अध्याय’ शुरू हो जाता है।
आख्या में NEFT, तो UTR नंबर कहाँ है ?
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि 10 सितंबर को NEFT वास्तव में हुआ, तो उसका UTR/Transaction ID, बैंक रिकॉर्ड और संबंधित खाते का स्पष्ट विवरण सामने क्यों नहीं है?
अब सवाल यह भी उठ रहा है कि
- NEFT किस तारीख और किस समय Initiate हुआ?
- बैंक ने उसे कब Process किया?
- ₹2,36,900 की रकम किस सरकारी खाते से Debit हुई?
- ठेकेदार के किस बैंक खाते में Credit हुई?
- संबंधित भुगतान का UTR नंबर क्या है?
- चेक तैयार करने, हस्ताक्षर करने और बैंक में प्रस्तुत करने की वास्तविक तारीख क्या है?
यानी मामला कुछ ऐसा है कि सरकारी फाइल कह रही है—पैसा रवाना हो गया”, लेकिन शिकायतकर्ता पूछ रहा है—रास्ते में कौन सा चौराहा आया, जरा बैंक स्टेटमेंट भी दिखा दीजिए!”
अधिशासी अधिकारी की आख्या बनी सवालों का केंद्र
मामले में अधिशासी अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर भुगतान होने की बात कही गई है। ऐसे में शिकायतकर्ता की मांग है कि केवल कार्यालयी आख्या के आधार पर मामला बंद करने के बजाय 10 से 19 सितंबर तक की प्रमाणित बैंक स्टेटमेंट से भुगतान का सत्यापन कराया जाए। यानी अब जांच की असली कसौटी फाइल नहीं, बैंक की एंट्री हो सकती है।
जांच हो तो ‘कागज बनाम बैंक’ का फैसला साफ हो जाए!
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मामले की अभिलेखीय जांच कराई जाए और यदि भुगतान हुआ है तो उसका UTR, Transaction ID, Debit Entry और Credit Entry सामने रखी जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं हुआ था तो आख्या में भुगतान होने का उल्लेख किस अभिलेखीय आधार पर किया गया।
मामला सिर्फ ₹2.36 लाख का नहीं है—सवाल सरकारी धन की पारदर्शिता का है। क्योंकि सरकारी भुगतान में NEFT हो गया” कहना आसान है, लेकिन बैंक स्टेटमेंट में उसका निशान दिखाना ही असली परीक्षा है।
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