अम्बेडकर नगर: फर्जी सत्यापन का ‘खेल’ पकड़ में आया, ग्राम पंचायत अधिकारी शरद चन्द पर कार्रवाई की जगह चेतावनी की"मीठी गोली"
हरैया ग्राम पंचायत में आईजीआरएस जांच ने खोली फाइलों की परत—पूर्व सचिव के अधूरे काम पर वर्तमान सचिव के हस्ताक्षर को जांच रिपोर्ट ने माना विधिसंगत नहीं
अम्बेडकरनगर, अचल वार्ता। ग्राम पंचायत हरैया में सरकारी अभिलेखों के सत्यापन को लेकर दर्ज आईजीआरएस शिकायत की जांच पूरी हो गई है। जांच रिपोर्ट परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण द्वारा मुख्य विकास अधिकारी (CDO) को भेजी गई है। रिपोर्ट में पत्रावली की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल सामने आने के बावजूद फिलहाल कार्रवाई की जगह दोनों सचिवों को ‘सचेत’ करने की सिफारिश ने पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।
पहले सचिव का काम, दूसरे ग्राम पंचायत अधिकारी शरद चन्द के हस्ताक्षर—फाइलों में किसके अधिकार से 'हस्ताक्षर’
शिकायतकर्ता ने आईजीआरएस पोर्टल पर आरोप लगाया था कि ग्राम पंचायत हरैया में पंचायत सचिव द्वारा पद का दुरुपयोग करते हुए अभिलेखों का फर्जी तरीके से सत्यापन किया गया। जांच के दौरान वर्तमान ग्राम पंचायत अधिकारी शरदचन्द ने अपने बयान में बताया कि उन्हें ग्राम पंचायत हरैया के क्लस्टर का प्रभार 9 मार्च 2026 को मिला था। उनके अनुसार शिकायत में उल्लिखित निर्माण कार्य तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी सर्वेश कुमार के कार्यकाल में पूरे कराए गए थे। बताया गया कि भुगतान के समय तत्कालीन सचिव चिकित्सीय अवकाश पर चले गए, जिसके कारण पत्रावली पर उनके हस्ताक्षर नहीं हो सके। इसके बाद वर्तमान सचिव द्वारा अभिलेखों का सत्यापन कर भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। यहीं से मामला फाइल आगे बढ़ाने’ से निकलकर ‘फाइल में किसका हस्ताक्षर और किस अधिकार से वाले सवाल पर पहुंच गया।
जांच रिपोर्ट ने भी माना—वर्तमान सचिव का हस्ताक्षर विधिसंगत नहीं था
जांच रिपोर्ट के अनुसार पत्रावली के अनुशीलन से यह सामने आया कि तत्कालीन सचिव द्वारा प्रक्रिया अधूरी छोड़ी गई थी और वर्तमान सचिव द्वारा उस पर हस्ताक्षर किया जाना विधिसंगत नहीं था। यानी सरकारी फाइल ने खुद ही सवाल खड़ा कर दिया जिस काम का समय अलग, सचिव अलग और कार्यकाल अलग, उसमें बाद में आए सचिव की कलम कैसे चल गई हालांकि जांच में यह भी उल्लेख किया गया कि शिकायतकर्ता ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर कोई शिकायत नहीं की थी और जांच में किसी वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई।
‘कार्रवाई’ की जगह ‘सचेत’ फाइल को मिला चेतावनी वाला इलाज!
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए परियोजना निदेशक द्वारा जिला पंचायतराज अधिकारी (DPRO) को दोनों सचिवों को अपने स्तर से सचेत करने की सिफारिश की गई है। अब सवाल यह है कि यदि जांच में यह स्पष्ट माना गया कि वर्तमान सचिव द्वारा पूर्व सचिव के कार्यकाल की पत्रावली पर हस्ताक्षर करना विधिसंगत नहीं था, तो फिर इस मामले में केवल चेतावनी देकर जिम्मेदारी पूरी मान ली जाएगी सरकारी अभिलेखों की प्रक्रिया पर सवाल हो तो क्या ‘सचेत’ शब्द ही पूरी कार्रवाई कैसे मान लिया गया!
डीएम के संज्ञान में मामला कब और किस रूप में जाएगा?
मामले को लेकर अब जिलाधिकारी के स्तर पर गंभीरता से संज्ञान लिए जाने की मांग उठ रही है। खासकर तब, जब जांच रिपोर्ट में पत्रावली की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति दर्ज हो चुकी है। वहीं शिकायतकर्ता की ओर से जिला पंचायतराज विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि गंभीर मामलों में जिम्मेदारी तय करने के बजाय कार्रवाई को चेतावनी तक सीमित कर दिया जाता है। हालांकि रिश्वत, कमीशन या किसी अधिकारी द्वारा आर्थिक लाभ लेने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
जनपद के कार्यालयों बड़ा झरोखा
जब फाइल में गलती दिख गई, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?पूर्व सचिव की अधूरी प्रक्रिया या वर्तमान सचिव के हस्ताक्षर—जवाबदेही आखिर किसे सचेत’ करने से सरकारी अभिलेखों की वैधानिकता कैसे सुनिश्चित होगी और सबसे बड़ा सवाल अगर गलती सिर्फ चेतावनी से खत्म हो सकती है, तो जांच रिपोर्ट में विधिसंगत न होने की बात लिखने की जरूरत ही क्या थी।अब निगाहें जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि मामला केवल ‘चेतावनी की चिट्ठी’ तक सीमित रहता है या सरकारी अभिलेखों की प्रक्रिया को लेकर जिम्मेदारी भी तय होती है।
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