न्यायालय के आदेश को नहीं पालन कर रहे है हंसवर थाने के थानेदार
अदालत के आदेश के बाद शिकायतकर्ता का दावा—समय सीमा बीती, फिर भी हंसवर थाने में FIR दर्ज नहीं; थाने के चक्कर काट रहे बाबा, जवाब के नाम पर सन्नाटा!
अम्बेडकरनगर अचल वार्ता। हंसवर थाना क्षेत्र के ग्राम कैवटला स्थित एक मठ की जमीन और संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामले में अदालत ने पुलिस को आरोपों के संबंध में अभियोग पंजीकृत कर नियमानुसार विवेचना करने का आदेश दिया है। आदेश 18 सितंबर 2026 को सिविल जज (सीनियर डिवीजन)/एसीजेएम, अम्बेडकरनगर की अदालत से पारित होने की बात सामने आई है। प्रार्थना पत्र में शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि मठ के पूर्व महंत बाबा रामनिहाल दास की मृत्यु के बाद परिवार रजिस्टर एवं अन्य अभिलेखों में कथित कूटरचना के जरिए करीब 22 बीघा मठ की जमीन अपने नाम दर्ज करा ली गई। इसके अलावा मठ की जमीन के कुछ हिस्सों को बेचने तथा मठ की कुटी की लकड़ी और अन्य सामान बेचे जाने के भी आरोप लगाए गए हैं। मामले में हरिशंकर दास पर भी कथित कब्जे और संपत्ति के विक्रय के प्रयास से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनका अंतिम सत्य पुलिस विवेचना एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
पहले थाना, फिर एसपी और अब अदालत की दस्तक
शिकायतकर्ता का कहना है कि मामले की शिकायत पहले थाना हंसवर में की गई, लेकिन FIR दर्ज नहीं हुई। इसके बाद 11 अगस्त 2026 को पुलिस अधीक्षक अम्बेडकरनगर को भी प्रार्थना पत्र दिया गया। अदालत ने थाना हंसवर से आख्या तलब की तो आख्या में संबंधित मामले में कोई अभियोग दर्ज न होने की बात सामने आई। अदालत ने प्रथमदृष्टया आरोपों को संज्ञेय प्रकृति का मानते हुए साक्ष्य जुटाने और विवेचना की आवश्यकता बताई तथा थानाध्यक्ष हंसवर को अभियोग दर्ज कर नियमानुसार विवेचना सुनिश्चित करने का आदेश दिया।
अब ‘सात दिन’ की घड़ी पर सवाल
शिकायतकर्ता बाबा मनीष दास का कहना है कि अदालत की ओर से सात दिन के भीतर कार्रवाई/रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश बताया गया था, लेकिन समय सीमा बीतने के बावजूद अभी तक FIR दर्ज नहीं हुई है। उनका आरोप है कि थाने में जानकारी लेने पर कर्मचारी स्पष्ट जवाब भी नहीं दे रहे हैं। यानी मामला अब कुछ ऐसा हो गया है—अदालत ने कहा “FIR करो”, शिकायतकर्ता कह रहे हैं “FIR हुई नहीं”, और थाने के दरवाजे पर सवाल खड़ा है—आखिर कार्रवाई की फाइल किस टेबल पर आराम फरमा रही है?
मठ की संपत्ति का मामला, इसलिए जांच भी हो ‘ठोस’
मठ की संपत्ति करीब 22 बीघा जमीन, अभिलेखों में कथित हेरफेर और संपत्ति की बिक्री जैसे आरोपों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। ऐसे में शिकायतकर्ता की मांग है कि अदालत के आदेश के अनुरूप मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना की जाए और जमीन व संपत्ति से जुड़े अभिलेखों की भी जांच कराई जाए। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—अदालत का आदेश सामने है, सात दिन की बात कही जा रही है, लेकिन FIR की ‘एंट्री’ आखिर पुलिस की डायरी में कब होगी?
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