सुरक्षा किट गायब, ड्यूटी ‘24 घंटे’ की! बिजली संविदाकर्मियों की जान से हो रहा ‘करंट वाला खेल
जनपद अम्बेडकरनगर अचल वार्ता| बिजली विभाग में संविदा कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों की शिकायत है कि मानक के अनुरूप सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए बिना उनसे जोखिम भरे बिजली कार्य कराए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, आरोप है कि निर्धारित 8 घंटे की ड्यूटी के बजाय कई बार 12 से 24 घंटे तक काम लिया जाता है। यानी बिजली विभाग में शायद घड़ी भी ओवरलोड चल रही है। संविदाकर्मियों का कहना है कि बिजलीघरों के लिए सुरक्षा सामग्री आती तो है, लेकिन उन्हें पूरी सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जाती। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि सुरक्षा उपकरण आखिर रास्ते में कहां ‘गायब’ हो जाते हैं? क्या इसकी जानकारी अधिशासी अभियंता और अधीक्षण अभियंता को है या फिर फाइलों में शैतानी खुराफात चल रहा है।मामला सिर्फ सुरक्षा उपकरणों तक सीमित नहीं है। कर्मचारियों का आरोप है कि ट्री कटिंग के लिए करोड़ों रुपये के टेंडर किए जा रहे हैं, लेकिन उसी काम को लाइनमैन संविदाकर्मियों से भी अतिरिक्त कार्य कराया जा रहा है। ऐसे में सवाल है कि जब ट्री कटिंग का ठेका दिया गया है तो ठेकेदार के जिम्मे लगाए गए श्रमिक आखिर कहां हैं। कर्मचारियों का कहना है कि एक तरफ उन्हें बिजली लाइनों पर जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ता है और दूसरी तरफ पेड़ों की कटाई जैसे अतिरिक्त जोखिम वाले काम भी सौंपे जाते हैं। ऐसे में विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सबसे गंभीर आरोप सुरक्षा सामग्री और ट्री कटिंग के टेंडरों में कथित अनियमितताओं को लेकर लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। यदि वास्तव में सुरक्षा सामग्री की खरीद-वितरण और ट्री कटिंग के टेंडरों में वित्तीय गड़बड़ी हुई है तो निष्पक्ष जांच में इसका पूरा हिसाब किताब सामने आना चाहिए। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर ट्री कटिंग का ठेका किस फर्म को दिया गया है? उसके पास कितने प्रशिक्षित श्रमिक हैं। काम की निगरानी कौन कर रहा है। और संविदा लाइनमैन से वही काम क्यों कराया जा रहा है जिसके लिए टेंडर जारी किया गया!कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़े इन आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। आखिर बिजली के तारों से खेलने वालों को सुरक्षा मिलेगी या फिर विभाग की फाइलों में ही सुरक्षा उपकरण पहने रहेंगे?
अब गेंद विभागीय अधिकारियों के पाले में है—जवाब सुरक्षा का चाहिए, सिर्फ कागजी खानापूर्ति का नहीं।
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