कुर्सी गई, राहत नहीं मिली फाइल अभी ‘वेटिंग’ में! हाईकोर्ट ने शासन से मांगा जवाब
पूर्व चेयरमैन ओमकार गुप्ता को तत्काल राहत नहीं; 8 अक्टूबर तक शासन को बताना होगा पूरा ‘हिसाब-किताब
अम्बेडकरनगर अचल वार्ता। नगर पंचायत अशरफपुर किछौछा की चेयरमैन की कुर्सी का मामला अब अदालत की चौखट पर पहुंचकर कुछ ऐसा हो गया है कि कुर्सी तो चली गई, लेकिन कानूनी पेंच अभी बाकी है। पूर्व चेयरमैन ओमकार गुप्ता को शासन के पद समाप्ति आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ से फिलहाल तत्काल राहत नहीं मिली है। अदालत ने शासन से पूरे मामले पर विस्तृत जवाब तलब करते हुए 8 अक्टूबर तक का समय दिया है। मामला नगर पंचायत के कामकाज से जुड़े कई आरोपों से संबंधित है। आरोपों में अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना, कर्मचारियों के साथ हड़ताल पर बैठना, शासन के नियमों के विपरीत बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित कर टेंडर जारी करना तथा कर्मचारियों के भुगतान में कथित बाधा डालना शामिल बताया गया है। यानी नगर पंचायत का मामला कुछ ऐसा रहा कि फाइलें चलती रहीं और मामला आखिरकार हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच गया। बताया गया कि इन्हीं आरोपों के आधार पर शासन ने सितंबर 2025 में तत्कालीन चेयरमैन के वित्तीय अधिकार सीज कर दिए थे। इसके खिलाफ ओमकार गुप्ता हाईकोर्ट पहुंचे। उनकी ओर से दलील दी गई कि आदेश से पहले उन्हें पर्याप्त सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। उस समय न्यायालय ने शासन के आदेश पर रोक लगाते हुए नियमानुसार सुनवाई कर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसके बाद जिलाधिकारी स्तर पर मामले की सुनवाई हुई और रिपोर्ट शासन को भेजी गई। शिकायतकर्ता एवं सभासद विनोद कुमार ने रिपोर्ट पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दाखिल की। इसके बाद शासन स्तर पर हुई कार्रवाई में चेयरमैन को आरोपों का दोषी मानते हुए उनका पद समाप्त कर दिया गया। अब पूर्व चेयरमैन ने इस आदेश को भी हाईकोर्ट में चुनौती दे दी है। सुनवाई के दौरान उनकी ओर से कहा गया कि शासन ने अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया। याचिकाकर्ता के मुताबिक 7 अगस्त की रात करीब आठ बजे के बाद व्हाट्सऐप पर नोटिस मिला, फिर शनिवार-रविवार की छुट्टी और सोमवार को सुनवाई—ऐसे में तैयारी के लिए समय आखिर मिले तो मिले कैसे? याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि उन्होंने अतिरिक्त समय मांगा था। साथ ही संबंधित अवमानना मामले की अगली सुनवाई 22 अगस्त को निर्धारित थी, इसलिए शासन के पास सुनवाई के लिए और समय देने का अवसर था। हालांकि, शासन की कार्रवाई के बाद चेयरमैन का पद समाप्त कर दिया गया।
एक और मुकदमा भी चर्चा में
सुनवाई के दौरान ओमकार गुप्ता से जुड़े एक अन्य आपराधिक मामले का भी उल्लेख हुआ। उन्हें एससी/एसटी अधिनियम से जुड़े मामले में दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाए जाने की बात भी सामने आई। ऐसे में चेयरमैन की कुर्सी का विवाद अब केवल नगर पंचायत की बैठकों और प्रस्तावों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि न्यायिक रिकॉर्ड के कई पन्ने भी इस कहानी में जुड़ गए हैं।
अब शासन की बारी, 8 अक्टूबर को खुलेगा अगला पन्ना
फिलहाल हाईकोर्ट ने पद समाप्ति आदेश पर तत्काल राहत देने के बजाय शासन से विस्तृत जवाब मांगा है। अब 8 अक्टूबर की तारीख पर शासन अपना पक्ष रखेगा और अदालत आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी। फिलहाल नगर पंचायत की सियासत में तस्वीर कुछ ऐसी हैकुर्सी पर ताला शासन ने लगाया है, चाबी का दावा पूर्व चेयरमैन कर रहे हैं और अंतिम फैसला अदालत की फाइल में सुरक्षित है।
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