बरियावन कांड के बाद गिरी गाज, अकबरपुर कोतवाल संतोष कुमार सिंह निलंबित
नकाबपोशों ने चलाया बुलडोजर, सवालों ने पुलिस की नींद उड़ाई; विभागीय जांच के आदेश
अम्बेडकरनगर। बरियावन बाजार में गरीबों के आशियाने पर नकाबपोशों द्वारा बुलडोजर चलाए जाने की घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सुर्खियों में आने के बाद पुलिस अधीक्षक ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कोतवाली अकबरपुर के प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी बड़ी कार्रवाई करने वाले नकाबपोश आए कहां से और इतनी बड़ी घटना को अंजाम देने के दौरान स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था कहां थी? घटना सामने आने के बाद सवालों की बौछार हुई तो पुलिसिया व्यवस्था भी कठघरे में आ गई।
पत्रकारों से कथित टकराव के भी चर्चा में
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि पिछले करीब छह माह के दौरान अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र में तीन पत्रकारों के खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज होने से पत्रकारों में नाराजगी थी। इसके बाद पत्रकारों ने मामले की पड़ताल तेज कर दी। बरियावन की घटना सामने आने के बाद पुलिस की भूमिका और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे। कहावत है कि कलम की स्याही जब सवाल पूछने लगे तो फाइलों की धूल भी उड़ने लगती है। बरियावन प्रकरण में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। हालांकि किसी अधिकारी की कथित संलिप्तता की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
निरीक्षण में सामने आई लापरवाही
निलंबन आदेश में कहा गया है कि प्रभारी निरीक्षक के क्षेत्र में इस प्रकार की घटना का घटित होना उनकी कार्यप्रणाली और पर्यवेक्षण पर सवाल खड़े करता है। पुलिस विभाग की नियमावली के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उनके विरुद्ध विभागीय जांच प्रस्तावित की गई है। यानी मामला इतना गंभीर माना गया कि कुर्सी पहले गई और जवाब बाद में मांगा जाएगा। अब विभागीय जांच में यह सामने आएगा कि घटना में पुलिस की निगरानी कहां चूकी और जिम्मेदारी किसकी बनती है।
निलंबन अवधि में पुलिस लाइन से जुड़ेंगे
आदेश के अनुसार निलंबन अवधि में निरीक्षक को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। इसके लिए उन्हें प्रमाण-पत्र देना होगा कि निलंबन अवधि में वह कोई अन्य रोजगार, व्यवसाय या व्यापार नहीं कर रहे हैं। निलंबन अवधि में कोतवाल संतोष कुमार सिंह पुलिस लाइन अम्बेडकरनगर से संबद्ध रहेंगे और बिना पूर्व अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।
अब जांच बताएगी असली तस्वीर
बरियावन की घटना ने पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए हैं। निलंबन के बाद अब सबकी निगाहें विभागीय जांच पर टिकी हैं। जांच में यह साफ होगा कि नकाबपोशों ने घटना को कैसे अंजाम दिया, पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी और पूरे प्रकरण में किसकी क्या जिम्मेदारी थी। फिलहाल इतना जरूर है कि जिस थाने की निगरानी में घटना हुई, उसी थाने के प्रभारी पर कार्रवाई की गाज गिर चुकी है। अब फाइलें बोलेंगी और जांच तय करेगी कि कहानी में असली खिलाड़ी कौन था।
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