‘मान्यता’ का पेच, ‘गाटा’ का खेल! हर्षेश्वरनाथ विद्यालय पर एडी बेसिक की नजर, अब कागज नहीं.....जमीन भी देगी जवाब

Sep 21, 2026 - 17:42
Sep 21, 2026 - 17:54
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‘मान्यता’ का पेच, ‘गाटा’ का खेल! हर्षेश्वरनाथ विद्यालय पर एडी बेसिक की नजर, अब कागज नहीं.....जमीन भी देगी जवाब
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गाटा 3285 या 3898? विद्यालय भवन की जमीन ने बढ़ाई विभाग की टेंशन, औचक जांच और राजस्व सत्यापन के निर्देश

   अम्बेडकरनगर। हर्षेश्वरनाथ प्रा० विद्यालय, ब्राह्मणपट्टी, भियांव की मान्यता, भवन और भूमि को लेकर उठे सवाल अब फाइलों की अलमारी से निकलकर जांच की मेज तक पहुंच गए हैं। सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक), अयोध्या मंडल ने 17 सितंबर 2026 को बीएसए को पत्र जारी कर औचक स्थलीय निरीक्षण, विद्यालय की वास्तविक स्थिति व मान्यता का सत्यापन तथा गाटा संख्या 3285 की राजस्व अधिकारियों से जांच कराने के निर्देश दिए हैं। यानी अब सिर्फ कागजों की कहानी नहीं चलेगी, मौके की जमीन भी अपनी कहानी सुनाएगी।

गाटा नंबर ने फंसाया ‘गणित’, 3285 या 3898?

मामले में सबसे दिलचस्प पेच विद्यालय भवन की जमीन को लेकर है। शिकायतकर्ता का दावा है कि राजस्व अभिलेखों के अनुसार विद्यालय भवन गाटा संख्या 3898 पर स्थित है, जिसे खेल मैदान की ग्राम समाज भूमि के रूप में दर्ज बताया गया है। इसी भूमि को लेकर तहसील जलालपुर में विवाद संबंधी मुकदमा चलने की बात भी सामने आई है। दूसरी ओर संस्था की ओर से विद्यालय गाटा संख्या 3285 पर होने का दावा किए जाने की बात कही गई है। अब विभाग के सामने सीधा सवाल है! विद्यालय आखिर 3285 पर है या 3898 पर ऐसे में खतौनी, खसरा और नक्शे का मिलान कर मौके पर सीमांकन कराने की मांग ने मामले को और रोचक बना दिया है। कहने को गाटा नंबर महज कुछ अंक हैं, लेकिन यहां यही अंक पूरे मामले का हिसाब-किताब बदल सकते हैं।

2001 की तहरीर ने खोली पुरानी फाइल की खिड़की

मामले में वर्ष 2001 की एक तहरीर भी फिर चर्चा में आ गई है। बताया गया है कि तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा थाना अध्यक्ष, जलालपुर को दी गई तहरीर में वर्ष 1991 के दो कथित विभागीय पत्रों के आधार पर प्राथमिक अनुभाग की मान्यता तथा शिक्षकों की नियुक्ति/विनियमन से संबंधित अभिलेखों की प्रमाणिकता पर सवाल उठाए गए थे। अब शिकायतकर्ता की मांग है कि इन पत्रों का सत्यापन मूल विभागीय पत्रावली से कराया जाए। यानी पुरानी फाइलों की धूल झाड़कर यह पता लगाने की कोशिश होगी कि 1991 के कागज वास्तव में विभाग की फाइल में मौजूद हैं या फिर उनका सफर सिर्फ पुराने दस्तावेजों तक ही सीमित है।

अब ‘कागज बोलेंगे’ या ‘जमीन’?

    प्रस्तावित जांच में प्रवेश पंजिका, छात्र-शिक्षक उपस्थिति, परीक्षा अभिलेख, प्रबंधन समिति की कार्यवाही पुस्तिका समेत अन्य मूल दस्तावेजों की पड़ताल तथा भवन और भूमि की फोटो-वीडियोग्राफी कराने का अनुरोध किया गया है। यानी इस बार फाइल में रखी तस्वीरों से काम नहीं चलेगा—मौके की तस्वीर और जमीन की हकीकत भी कैमरे में कैद होगी।

6 जुलाई की जांच के बाद फिर औचक निरीक्षण

  गौरतलब है कि 6 जुलाई 2026 को मंडल स्तरीय टीम विद्यालय का स्थलीय निरीक्षण कर चुकी है। शिकायतकर्ता के अनुसार उस निरीक्षण में कई अनियमितताएं सामने आने की बात तत्कालीन जांच रिपोर्ट में दर्ज की गई थी। अब एडी बेसिक के नए निर्देश के बाद एक बार फिर जांच की प्रक्रिया तेज होने से विद्यालय प्रबंधन और विभागीय स्तर पर हलचल बढ़ना स्वाभाविक है।

अब खुलेगा ‘मान्यता का राज’, गाटा बताएगा असली पता!

     फिलहाल पूरा मामला दो अहम सवालों के इर्द-गिर्द घूम रहा है—विद्यालय भवन वास्तव में किस गाटा पर है और वर्षों पुरानी मान्यता का आधार मूल विभागीय अभिलेखों में कितना मजबूत है। नई जांच में यदि राजस्व अभिलेख, मौके की पैमाइश और विभागीय मूल पत्रावली एक ही कहानी सुनाती है तो तस्वीर साफ हो जाएगी। लेकिन अगर गाटा नंबर और सरकारी फाइल के बयान अलग-अलग निकले, तो वर्षों से चल रही व्यवस्था पर नए सवाल खड़े होना तय माना जा रहा है। फिलहाल विद्यालय की ‘कक्षा’ तो चल रही है, लेकिन असली परीक्षा अब विभागीय फाइलों और जमीन के गाटा नंबर की होने वाली है।

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