अम्बेडकर नगर: थाने में ‘कुर्सी का हिसाब’: पहले कौन पहुंचा, सीसीटीवी बताएगा राज
- भूमि विवाद में एक पक्ष को घंटों थाने बैठाने का आरोप, एसपी से शिकायत के बाद विपक्षी को बुलाने का दावा
अम्बेडकरनगर, अचल वार्ता। थाना आलापुर क्षेत्र के ग्राम पिपरा में जमीन पर मिट्टी पाटने का विवाद अब खेत की मेड़ से निकलकर थाने की चौखट तक पहुंच गया है। मामला ऐसा कि कौन पहले थाने पहुंचा और कौन बाद में—इसका फैसला अब बयान से नहीं, सीसीटीवी की ‘आंख’ से कराने की मांग उठी है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, भूमि पर मिट्टी पाटने को लेकर चल रहे विवाद में सौरभ पांडेय और ओमप्रकाश पांडेय को भूमि संबंधी कागजात देखने के लिए थाना बुलाया गया।
आरोप है कि दोनों को बुलाए जाने से पहले कोई लिखित नोटिस अथवा स्पष्ट सूचना नहीं दी गई। शिकायत में बताया गया है कि संबंधित भूमि की पूर्व में कानूनगो और लेखपाल द्वारा मौके पर निशानदेही कराई जा चुकी है और वहां पिलर भी लगाए गए थे। इसके बाद ओमप्रकाश पांडेय अपनी भूमि पर मिट्टी पाटने का काम कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें और सौरभ पांडेय को थाने बुला लिया।
एसपी को फोन गया तो ‘दूसरे पक्ष’ की भी एंट्री!
शिकायतकर्ता का दावा है कि जब मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक से फोन पर की गई, तो इसके बाद विपक्षी पक्ष के रमेश को भी थाना आलापुर बुलाया गया। आरोप के मुताबिक, एक पक्ष करीब तीन घंटे पहले से थाने में मौजूद था, जबकि रमेश लगभग दोपहर एक बजे थाने पहुंचा।
अब शिकायतकर्ता की मांग है कि थाना परिसर के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जाए, ताकि यह पता चल सके कि थाने की ‘हाजिरी रजिस्टर’ में किसकी एंट्री पहले हुई और किसकी बाद में। यानी जमीन की पैमाइश भले राजस्व विभाग ने की हो लेकिन अब थाने पहुंचने के समय की पैमाइश कैमरा करने वाला है।
पुलिस का कहना—दोनों पक्ष थाने पर बैठे
शिकायत में थाना प्रभारी से फोन पर हुई बातचीत का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, थाना प्रभारी ने दोनों पक्षों को थाने पर बैठाए जाने की बात कही। हालांकि शिकायतकर्ता का दावा है कि वास्तविक स्थिति में एक पक्ष पहले से थाने में मौजूद था और दूसरे पक्ष को बाद में बुलाया गया। मामले में ओमप्रकाश पांडेय की पूर्व में हृदय संबंधी बाईपास सर्जरी होने की बात भी शिकायत में कही गई है। शिकायतकर्ता ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए पुलिस से मानवीय और विधिसम्मत व्यवहार किए जाने की मांग की है।
अब सवाल जमीन का कम, कार्रवाई का ज्यादा
शिकायतकर्ता ने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोनों पक्षों को थाने बुलाए जाने के आधार की पड़ताल करने, पूर्व में हुई राजस्व निशानदेही और लगाए गए पिलरों को जांच में शामिल करने तथा थाना परिसर की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर जांचने की मांग की है।
अब देखना यह है कि जांच में मिट्टी किसने पाटी, जमीन किसकी है और थाने में पहले कौन बैठा—इन तीनों सवालों के जवाब कागज, पुलिस रिकॉर्ड और सीसीटीवी में कैसे सामने आते हैं।फिलहाल मामला इतना जरूर साफ है कि खेत का विवाद अब थाने की ‘टाइमिंग’ का विवाद बन गया है।
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