मीटर शून्य, बिल हजारों का! टांडा बिजली विभाग का ‘करिश्माई हिसाब
बिना कनेक्शन बिल, बिना मांग भार बढ़ा—मोबाइल मैसेज और मीटर बिल में भी ‘दो-दो हिसाब’; उपभोक्ता बोले- बिजली कम, चक्कर ज्यादा
अम्बेडकरनगर। विद्युत वितरण खंड टांडा एक बार फिर उपभोक्ताओं की शिकायतों को लेकर चर्चा में है। यहां विद्युत बिलिंग व्यवस्था को लेकर सामने आ रही शिकायतों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि कहीं बिना विद्युत संयोजन के बिल जारी हो रहा है तो कहीं बिना किसी मांग के विद्युत भार अथवा क्षमता बढ़ती दिखाई दे रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर बिजली के इस हिसाब-किताब में ‘करिश्मा’ कौन कर रहा है। मीडिया पड़ताल के दौरान सामने आई शिकायतों के मुताबिक कुछ उपभोक्ताओं के मीटर पर रीडिंग शून्य अथवा बेहद कम होने के बावजूद बिल में अपेक्षाकृत अधिक धनराशि दिखाई दे रही है। वहीं, कुछ उपभोक्ताओं का कहना है कि मोबाइल पर प्राप्त विद्युत बिल और मीटर अथवा विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज विवरण के बीच भी अंतर नजर आता है।
बिजली से ज्यादा दफ्तर के चक्कर!
बिल में गड़बड़ी की शिकायत लेकर उपभोक्ता कभी फीडर तो कभी विद्युत कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं। आरोप है कि कई मामलों में स्थायी समाधान देने के बजाय उपभोक्ताओं को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय की ओर भेज दिया जाता है। यानी घर में बिजली आए न आए, बिल सुधार के लिए दौड़ जरूर लगती रहती है। कुछ उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि शिकायत करने पर उन्हें संयोजन समाप्त करने की बात कही जाती है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल बिलिंग की तकनीकी समस्या तक सीमित न रहकर उपभोक्ता सेवा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
शून्य रीडिंग’ का गणित जांच का विषय
सबसे बड़ा सवाल उन मामलों को लेकर है जहां मीटर रीडिंग और बिल में दर्ज खपत के बीच कथित तौर पर अंतर दिखाई दे रहा है। आखिर मीटर कुछ और बता रहा है और बिल कुछ और, तो दोनों में से सही कौन है? इसका जवाब विभागीय जांच और बिलिंग रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।उपभोक्ताओं की शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कई शिकायतों का समाधान किए बिना ही उनका निस्तारण दर्ज कर दिया जाता है। यदि ऐसा हो रहा है तो शिकायत निस्तारण की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
करिश्माई बिलिंग’ का सच रिकॉर्ड बताएगा
पूरे मामले में विद्युत विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों, संविदाकर्मियों तथा बिलिंग व्यवस्था से जुड़े अन्य कार्मिकों की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी। जनहित से जुड़े इस मामले में बिलिंग रिकॉर्ड, मीटर रीडिंग, उपभोक्ता शिकायतों और विभागीय निस्तारण की निष्पक्ष जांच जरूरी है। क्योंकि यदि मीटर की सुई नहीं घूमी और बिल की रकम दौड़ पड़ी, तो सवाल उठना लाजिमी है—आखिर बिजली का हिसाब कौन लिख रहा है। मामले में मीडिया पड़ताल जारी है। आने वाले दिनों में बिलिंग प्रक्रिया, शिकायत निस्तारण और जिम्मेदार कार्मिकों की भूमिका से जुड़े दस्तावेजी तथ्यों की पड़ताल के आधार पर और खुलासे सामने आने की संभावना है।
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