डीपीआरओ कार्यशैली सवालों के घेरे में , भ्रष्टाचार की फाइलों पर कुंडली मार कर बैठे उपेंद्र कुमार!
हरैया, शंकर बिशुनपुर समेत कई ग्राम पंचायतों के मामलों में अनियमितताओं के दोष सिद्ध , शिकायतकर्ताओं ने निलंबन एवं प्रशासनिक कार्यवाही करने मांग की
अम्बेडकरनगर अचल वार्ता। पंचायत राज विभाग में ग्राम पंचायतों से जुड़ी शिकायतों और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जिला पंचायत राज अधिकारी उपेंद्र कुमार पांडेय की कार्यशैली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में जांच के दौरान अनियमितताएं सामने आने के बावजूद संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच रिपोर्ट से सिद्ध हुआ है सचेत करना लिख देना करवाई में लापरवाही जैसे गंभीर सवाल है।
हरैया में ईंट किसी की, भुगतान किसी और को देने का आरोप
ग्राम पंचायत हरैया से जुड़े एक मामले में पूर्व ग्राम सचिव मिथिलेश और वर्तमान सचिव विकास श्रीवास्तव पर करीब आठ लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, स्थलीय निरीक्षण के दौरान निर्माण में चौधरी ईंट भट्ठा की ईंटें मिलने की बात सामने आई, जबकि भुगतान किसी अन्य फर्म के नाम किए जाने का आरोप है। मामले में संबंधित दस्तावेजों और भुगतान प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
फर्जी हस्ताक्षर और अभिलेखों में हेरफेर के आरोप
दूसरे प्रकरण में ग्राम पंचायत अधिकारी शरद चंद्र पर सरकारी अभिलेखों में कथित हेरफेर और करीब दस लाख रुपये के भुगतान से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि जिला परियोजना निदेशक की पत्रावली के परीक्षण में पुरानी फाइलों के अधूरे होने तथा नए सचिव द्वारा पुराने अभिलेखों पर हस्ताक्षर किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल दर्ज किए गए हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यदि जांच में नियमविरुद्ध प्रक्रिया सामने आई है तो जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई कहां तक पहुंची।
एक शौचालय, भुगतान को लेकर दोहरी प्रक्रिया का आरोप
ग्राम पंचायत शंकर बिशुनपुर से जुड़े मामले में प्राथमिक विद्यालय के निकट बने शौचालय के निर्माण को लेकर भी वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि पूर्व सचिव अंकुर शर्मा के कार्यकाल में निर्माण अधूरा रह गया, जबकि भुगतान की राशि निकाल ली गई। बाद में वर्तमान सचिव द्वारा निर्माण पूरा कराने के बाद दोबारा भुगतान निकाले जाने की बात भी शिकायत में कही गई है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो एक ही कार्य के लिए दोहरे भुगतान की स्थिति की जांच जरूरी होगी।
दोष सिद्ध होने पर कार्रवाई की स्थिति पर उठ रहे सवाल
तीनों मामलों में मुख्य सवाल यही है कि शिकायतों और जांच से जुड़े दस्तावेजों के बावजूद विभागीय स्तर पर अब तक क्या कार्रवाई हुई। शिकायतकर्ताओं ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच, अभिलेखों के सत्यापन और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि शासन और जिला प्रशासन इन आरोपों की स्वतंत्र जांच कराकर दोषी सचिवों के ऊपर कार्यवाही जहमत उठाई जाएगी या क्या डीपीआरओ उपेंद्र कुमार पांडेय तथा संबंधित सचिवों को बचाने के मामले में डीपीआरओ उपेंद्र कुमार पांडे के ऊपर भी कोई सख्त कार्यवाही की जाएगी या नहीं लेकिन क्षेत्र में यह चर्चा जरूर है कि जब से डीपीआरओ उपेंद्र चार्ज संभाला तब से पंचायती राज में भ्रष्टाचार विष के कंठ में डूब गया
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