ब्लॉक भीटी में 'परिवार रजिस्टर' या भ्रष्टाचार का अड्‍डा? विधवा के 'डेढ़ लाख के खेल' वाले आरोपों से हिला पंचायत विभाग!

Oct 20, 2026 - 10:33
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ब्लॉक भीटी में 'परिवार रजिस्टर' या भ्रष्टाचार का अड्‍डा? विधवा के 'डेढ़ लाख के खेल' वाले आरोपों से हिला पंचायत विभाग!
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अधिकारियों पर वसूली, शोषण और साठगांठ का संगीन आरोप; एडीओ पंचायत के नए फरमान ने आग में डाला घी!

ब्लॉक भीटी (अम्बेडकरनगर)। सरकारी दफ्तरों में नियम-कानून कागज़ों पर चलते हैं या जेब के वजन से तय होते हैं? भीटी ब्लॉक से सामने आई इस खौफनाक दास्तान ने पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पति की मौत के गम से जूझ रही एक बेबस विधवा जब हक पाने के लिए सरकारी दफ़्तर पहुंची, तो उसे इंसाफ़ की जगह जो मिला, उसने पंचायत महकमे में भूचाल ला दिया है। ग्राम नोकरापुर निवासी पीड़िता शोभावती (पत्नी स्वर्गीय धीरेंद्र कुमार उपाध्याय) ने भीटी के एडीओ पंचायत प्रभात सिंह पर डेढ़ लाख रुपये की घूस मांगने पैसे वसूलने और गंभीर शारीरिक शोषण के रोंगटे खड़े कर देने वाले आरोप लगाए हैं। महिला ने सीधे पुलिस अधीक्षक के पास पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है।

गाड़ी में वसूली और शोषण का संगीन आरोप! पीड़िता के मुताबिक, 5 अगस्त 2026 को पति के निधन के बाद वह ससुराल के परिवार रजिस्टर में अपना नाम दर्ज कराने के लिए भटक रही थी। आरोप है कि नाम चढ़ाने के एवज में एडीओ पंचायत प्रभात सिंह ने फ़ोन पर डेढ़ लाख रुपये की मांग की। शोभावती जब रकम का इंतज़ाम कर पहुंचीं तो उन्हें कथित तौर पर गाड़ी में बैठाकर पैसे ऐंठ लिए गए और नाम चढ़ाने के नाम पर उनके साथ शारीरिक शोषण किया गया। विरोध करने पर पीड़िता को यह कहकर धमकाया गया— तुम विधवा हो मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाओगी!

इधर उठी शिकायत उधर जारी हुआ अस्वीकृति का आदेश'!

मामले में अब एक नया ड्रामा शुरू हो चुका है। महिला की शिकायत के ठीक बाद, 13 अक्टूबर 2026 को एडीओ पंचायत कार्यालय से एक आदेश जारी हुआ, जिसने मामले को पूरी तरह उलझा दिया है। कागजी दलील: आदेश में कहा गया कि ग्राम पंचायत सचिव की रिपोर्ट और स्थानीय लोगों के शपथ पत्र के आधार पर शोभावती का नाम दर्ज नहीं किया जा सकता, क्योंकि उनकी शादी किसी दूसरे गांव में हुई थी और नोकरापुर में उनके निवास के प्रमाण नहीं मिले। अपील का झांसा: आवेदन खारिज करते हुए पीड़िता को 30 दिनों के भीतर सक्षम अधिकारी के सामने अपील करने का रास्ता दिखाया गया है।पीड़िता का पलटवार— ससुराल और प्रधान से मिलकर रचा जा रहा षड्यंत्र!

एडीओ पंचायत के इस आदेश पर पीड़िता शोभावती ने तीखा सवाल उठाया है। पीड़िता का कहना है:

अगर मेरी शादी कहीं और हुई है, तो एडीओ पंचायत और मेरे ससुराल वाले इसका सबूत पेश करें! मेरे ससुराल वालों ने झूठ बोला है, और ग्राम प्रधान भी मिले हुए हैं। सिर्फ मौखिक बातों पर मेरा हक कैसे छीना जा सकता है? क्या किसी विधवा को इंसाफ़ देने के बजाय साजिश के तहत बेदखल किया जाएगा?बड़े सवाल—जिनका जवाब मिलना बाकी है। क्या वसूली और शोषण छिपाने के लिए आनन-फानन में आवेदन खारिज किया गया अगर महिला विवाहित है, तो उसके जायज ससुराल के परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने से कौन रोक रहा है। क्या पुलिस अधीक्षक इस मामले में निष्पक्ष जांच कराकर पीड़िता को इंसाफ़ दिला पाएंगे अब देखना यह होगा कि खाकी और प्रशासन इस बेबस विधवा के आंसुओं और संगीन आरोपों का संज्ञान लेकर क्या कार्रवाई करता है, या यह मामला भी दफ़्तरी फाइलों में दबा दिया जाएगा।

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