अशरफपुर किछौछा नगर पंचायत में ₹7.03 लाख की प्रतिभूति पर ‘ब्याज का गणित !
तीन साल तक नगर पंचायत के खाते में रही रकम, वापसी तो हुई लेकिन अब सवाल—इस दौरान खाते में आया ब्याज गया कहां?
अम्बेडकरनगर। नगर पंचायत अशरफपुर किछौछा में निविदा की प्रतिभूति राशि को लेकर अब एक नया सवाल खड़ा हो गया है। मामला सिर्फ ₹7,03,340 रुपये की वापसी तक सीमित नहीं है, बल्कि करीब तीन साल तक यह रकम नगर पंचायत के बैंक खाते में रहने के दौरान उस पर मिलने वाले ब्याज के हिसाब-किताब तक पहुंच गया है। यानी रकम वापस हो गई, लेकिन अब सवाल है कि इस दौरान ब्याज ने कौन-सी ‘यात्रा’ की? शिकायतकर्ता की ओर से जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में बताया गया है कि अक्टूबर 2023 में नगर पंचायत की निविदा में प्रतिभाग करने के दौरान मो. दानिश द्वारा ₹47,380 और ₹2,36,900, जबकि मो. शकील द्वारा ₹66,360 और ₹3,52,700 की प्रतिभूति राशि जमा की गई थी। चारों मदों को मिलाकर कुल राशि ₹7,03,340 बताई गई है। शिकायती पत्र के अनुसार निविदा निरस्त होने के बावजूद प्रतिभूति राशि तत्काल वापस नहीं की गई। शिकायत के बाद अगस्त एवं सितंबर 2026 में मो. दानिश को ₹2,84,280 तथा मो. शकील को ₹4,19,060, यानी कुल ₹7,03,340 वापस किए जाने की बात कही गई है।
पैसा वापस हुआ, अब ब्याज का ‘राज’ खुलेगा?
यहीं से कहानी में असली ट्विस्ट आता है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब ₹7.03 लाख के आसपास की रकम अक्टूबर 2023 से अगस्त-सितंबर 2026 तक नगर पंचायत के बैंक खाते में रही, तो स्वाभाविक रूप से यह जांच का विषय बनता है कि उस अवधि में खाते पर कितना ब्याज प्राप्त हुआ और उस ब्याज का लेखांकन किस मद में किया गया। अब सवाल यह है कि सरकारी खाते में जमा रकम पर आया ब्याज भी क्या सरकारी हिसाब-किताब में दर्ज हुआ? अगर हुआ तो किस खाते या मद में? और यदि अभिलेखों में ब्याज का स्पष्ट उल्लेख नहीं है तो फिर उसका हिसाब कौन देगा?
मूलधन वापस, ब्याज का क्या हुआ?’—यही है असली सवाल
शिकायत में जिलाधिकारी से मांग की गई है कि बैंक स्टेटमेंट, कैशबुक, लेजर और भुगतान वाउचर की जांच कराकर अक्टूबर 2023 से राशि वापसी तक प्राप्त कुल ब्याज की जानकारी सामने लाई जाए। साथ ही ब्याज के नगर पंचायत अभिलेखों में किए गए लेखांकन का प्रमाण भी उपलब्ध कराया जाए। शिकायतकर्ता ने यह भी मांग की है कि यदि ब्याज राशि का लेखांकन नहीं मिलता है तो जिम्मेदारी तय करते हुए नियमानुसार कार्रवाई एवं वसूली की जाए।
नगर पंचायत का हिसाब—कैलकुलेटर से या जांच रिपोर्ट से?
मामला अब सीधे-सीधे एक बड़े सवाल में बदलता दिखाई दे रहा है—₹7,03,340 की मूल रकम का हिसाब तो सामने आ गया, लेकिन लगभग तीन साल तक खाते में रहने के दौरान पैदा हुए ब्याज का हिसाब कौन बताएगा? क्योंकि सरकारी धन के मामले में कहानी सिर्फ इतनी नहीं होती कि पैसा आया और वापस चला गया। बीच में बैंक खाते ने उस रकम के साथ क्या किया, कितना ब्याज बना, वह ब्याज किस खाते में दर्ज हुआ और किस मद में दिखाया गया—इन सवालों के जवाब भी अभिलेखों में होने चाहिए। फिलहाल शिकायत के बाद निगाहें जांच पर टिक गई हैं। अब देखना यह है कि जांच में बैंक स्टेटमेंट और नगर पंचायत की फाइलें एक ही कहानी सुनाती हैं या ब्याज का ‘गणित’ कोई नया अध्याय खोलता है। बड़ा सवाल यही—₹7.03 लाख वापस हो गए, लेकिन तीन साल के ब्याज का हिसाब मांगा जा रहा है।
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