सारंगपुर में भुगतान की ‘इंटरलॉकिंग’ पर सवाल, फाइलों में सड़कें चमकीं तो जमीन पर जांच की बारी!
एक ही इलाकेContent में दो इंटरलॉकिंग भुगतान से लेकर ई-रिक्शा की Content₹64 हजार मरम्मत तक पर उठे सवाल—मिट्टी पटाई, रविश और इंटरलॉकिंग के काम भी जांच के घेरे में
अम्बेडकरनगर। कटेहरी विकासखंड की ग्राम पंचायत सारंगपुर में वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 के दौरान कराए गए विभिन्न विकास कार्यों और उनके भुगतान को लेकर अब फाइलों की ‘कसरत’ जमीन पर जांच की मांग में बदलती दिखाई दे रही है। शिकायत में कई ऐसे कार्यों और भुगतानों का उल्लेख किया गया है, जिनकी अभिलेखीय जांच के साथ-साथ मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का सत्यापन कराने की मांग की गई है। मामला सिर्फ सड़क का नहीं है साहब, यहां सवाल यह भी है कि फाइल में कितना काम हुआ और जमीन पर कितना दिखाई देता है। शिकायतकर्ता ने खंड विकास अधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में अलग-अलग कार्यों के प्राक्कलन, तकनीकी स्वीकृति, कार्यादेश, एमबी, बिल-वाउचर और भुगतान अभिलेखों की जांच की मांग की है।
एक काम या दो? इंटरलॉकिंग की ‘डबल एंट्री’ का सवाल
वर्ष 2025-26 में दिनांक 06 सितंबर 2025 को सामुदायिक शौचालय से उमापति के घर तक इंटरलॉकिंग कार्य के नाम पर ₹1,88,500 के भुगतान का उल्लेख है। वहीं रोशन लाल के घर से सामुदायिक शौचालय तक इंटरलॉकिंग के नाम पर ₹57,489 भुगतान की भी जानकारी शिकायत में दी गई है। अब असली सवाल यही है।दोनों सड़कें अलग-अलग हैं या एक ही सड़क ने दो बार भुगतान की शक्ल में ‘डबल रोल’ निभाया! शिकायत में मांग की गई है। कि दोनों कार्यों के एमबी, कार्यादेश और स्थल का मिलान कराया जाए। यदि जांच में दोनों भुगतान किसी समान कार्य अथवा समान स्थल से संबंधित पाए जाते हैं तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जाए।
ई-रिक्शा ने ली ₹64 हजार की ‘सर्विसिंग’!
वित्तीय वर्ष 2026-27 में 19 सितंबर 2026 को ई-रिक्शा/लोडर की मरम्मत के नाम पर ₹64,000 भुगतान का भी मामला उठाया गया है। अब जांच यह बताएगी कि वाहन कौन-सा है, कब खरीदा गया, पंचायत में बिना कूड़ा स्थल बने ही उसका उपयोग कितना हुआ, मरम्मत में ऐसा क्या हुआ कि बिल ने 64 हजार का दम भर दिया, और संबंधित बिल-वाउचर वास्तव में किस आधार पर पास हुआ।
19 हजार 500 की मिट्टी पटाई, जमीन भी पूछ रही हिसाब
13 सितंबर 2026 को मिट्टी पटाई के नाम पर ₹19,500 भुगतान का उल्लेख है। शिकायतकर्ता ने इसकी भी एमबी और वास्तविक कार्य से मिलान कराने की मांग की है। यानी कागज कहता है मिट्टी पड़ी, अब जमीन से पूछा जाएगा कि ‘भाई, तुम्हारे हिस्से में कितनी मिट्टी आई?
1लाख 65 हजार की इंटरलॉकिंग—कुंज इंटरप्राइजेज के काम की भी होगी नाप-जोख
होलिका दहन स्थल से हनुमान मंदिर तक इंटरलॉकिंग कार्य के लिए कुंज इंटरप्राइजेज को ₹1,65,000 भुगतान किए जाने का उल्लेख है। शिकायत में इस कार्य की प्राक्कलन, तकनीकी स्वीकृति, कार्यादेश, एमबी, बिल-वाउचर और मौके पर हुए वास्तविक कार्य का सत्यापन कराने की मांग की गई है। अब फाइलों की भाषा चाहे जितनी सुंदर हो, जमीन पर लगी इंटरलॉकिंग ही बताएगी कि कहानी कितनी मजबूत है।
92 हजार की रविश और ‘चार ट्रॉली’ का हिसाब
सबसे दिलचस्प सवाल पंचायत भवन से छोटू की दुकान तक रविश कार्य को लेकर है। शिकायत के अनुसार माया ट्रेडर्स को 13 सितंबर 2026 को ₹92,000 का भुगतान किया गया, जबकि शिकायतकर्ता का दावा है कि मौके पर लगभग चार ट्रॉली रविश ही डाली गई। अब यहां हिसाब बड़ा सीधा है—फाइल में 92 हजार, मौके पर चार ट्रॉली। जांच अगर निष्पक्ष तरीके से हुई तो एमबी और वास्तविक मात्रा का मिलान यह साफ कर सकता है कि रविश की कहानी में ट्रॉली बड़ी है या बिल।
अब फाइल नहीं, फील्ड बताएगा सच
शिकायतकर्ता ने बीडीओ से प्रत्येक प्रकरण की अलग-अलग अभिलेखीय एवं स्थलीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही प्राक्कलन, तकनीकी स्वीकृति, कार्यादेश, एमबी, बिल-वाउचर और भुगतान अभिलेखों का परीक्षण कराने की मांग की गई है।शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि जांच में अनियमितता अथवा सरकारी धन के अनुचित भुगतान की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारी, कर्मचारी अथवा अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों की जिम्मेदारी निर्धारित कर विभागीय कार्रवाई और नियमानुसार वसूली की जाए। साथ ही जांच आख्या और की गई कार्रवाई का विवरण जनसुनवाई पोर्टल पर अपलोड कराने की मांग भी की गई है। फिलहाल सवाल कई हैं, जवाब जांच के पास है। अब देखना यह होगा कि सारंगपुर में विकास कार्यों की फाइलें जब जमीन से मिलेंगी तो इंटरलॉकिंग, मिट्टी, रविश और मरम्मत—सबका हिसाब एक जैसा निकलता है या फाइल और फील्ड की कहानी अलग-अलग रास्ते पकड़ लेती है।
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