सांप की रस्सी' बनाने की कला किसी को सीखना है तो अम्बेडकर नगर पुलिस से सीखे!
शाहिद मुनीर सिद्दीकी RTI स्पेशलिस्ट को फंसाने के चक्कर में उल्टा पड़ गया दांव भ्रष्ट तंत्र का, स्टिंग ऑपरेशन ने बिगाड़ा पूरा 'ड्रामा
अम्बेडकर नगर अचल वार्ता| कहते हैं कि जब कोई ईमानदार व्यक्ति किसी सिस्टम के भ्रष्टाचार को हिलाने लगता है, तो सिस्टम के 'दीमक' एकजुट हो जाते हैं। अम्बेडकर नगर में कुछ ऐसा ही अजीबो-गरीब और दिलचस्प नजारा देखने को मिल रहा है। वर्ष 2014 और 2022 में RTI स्पेशलिस्ट शाहिद मुनीर सिद्दीकी ने जब फर्जीवाड़े, नियुक्ति घोटालों और कोरोना काल में खेलकूद के नाम पर डकारे गए सरकारी धन का कच्चा-चिट्ठा बाहर निकाला, तो भ्रष्ट अधिकारियों और नेताओं की नींव हिल गई।
अब जब गर्दन फंसने लगी, तो पूरी 'स्क्रिप्ट राइटिंग टीम' (जिसमें कुछ भ्रष्ट नेता, अधिकारी और पुलिस के चतुर दिमाग शामिल बताए जा रहे हैं) मैदान में उतरी और तैयार की गई एक अतरंगी कहानी!
लखनऊ में घटना, पर विवेचना अम्बेडकर नगर के आलापुर इंदई पुर के खेत के जंगलों एवं झाड़ियों में! कहानी इतनी फिल्मी है कि हंसते-हंसते पेट में बल पड़ जाएं! घटना का स्थान: लखनऊ की कोई बहुमंजिला इमारत।शिकायतकर्ती: गीता देवी जिन्हें कथित तौर पर मोहरा बनाया गया।कहानी: शाहिद मुनीर ने बेटी को नौकरी दिलाने का झांसा दिया। ट्विस्ट: बेटी को नौकरी दिलानी थी, पर लखनऊ के उस फ्लैट में मैडम गीता देवी अकेले ही पहुंचीं! अब सवाल यह उठता है कि बेटी की नौकरी के लिए मम्मी जी अकेले इंटरव्यू देने लखनऊ क्यों गईं?हद तो तब हो गई जब लखनऊ में घूमती डायल 112 की गाड़ियां, वहां के थाने और लखनऊ की अदालतें बेगानी हो गईं।
मुकदमा दर्ज हुआ अम्बेडकर नगर के आलापुर थाने में और विवेचना कहाँ हुई? आलापुर के 'इंदईपुर के जंगल और झाड़ियों' में! वाह रे अम्बेडकरनगर आलापुर की पुलिस प्रशासन! लखनऊ की घटना को आलापुर की झाड़ियों में खोज निकालने की इस अद्वितीय 'जासूसी कला' के लिए तो विशेष पुरस्कार मिलना चाहिए! स्टिंग ऑपरेशन ने बिगाड़ दिया पूरा 'सस्पेंस थ्रिलर'
साजिशकर्ताओं ने सोचा था कि फर्जी SC/ST एक्ट और भिन्न-भिन्न धाराओं में फंसाकर सच की आवाज को दबा देंगे। लेकिन बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी! हाल ही में सामने आए एक स्टिंग ऑपरेशन वीडियो ने पूरे फर्जी मुकदमे का रायता फैला दिया। वीडियो में खुद गीता देवी अपने जुर्म का इकबाल करती नजर आ रही हैं। मैडम जी ने साफ-साफ कबूल कर लिया कि इस फर्जी मुकदमे के पीछे पूर्व एसपी अम्बेडकर नगर, सीओ टमटा, आलापुर थाना प्रभारी, स्थानीय नेता और ब्लॉक के कुछ 'महा-भ्रष्ट' अधिकारियों का पूरा सहयोग और दिमाग लगा था।
जनता पूछ रही है तीखे सवाल:
जब घटना लखनऊ की थी, तो अम्बेडकर नगर की अदालत और पुलिस को इतना 'पर्सनल इंटरेस्ट' क्यों था? क्या कोरोना काल में गबन किए गए रुपयों का हिसाब छुपाने के लिए ही यह पूरी कहानी रची गई थी।अम्बेडकर नगर पुलिस ने 'सांप की रस्सी' बनाने की ट्रेनिंग कहाँ से ली है।फिलहाल, इस स्टिंग ऑपरेशन के बाहर आने के बाद से साजिश रचने वाले नेताओं और अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं। जो लोग दूसरे के लिए गड्ढा खोद रहे थे, अब खुद उसमें गिरते नजर आ रहे हैं। अम्बेडकर नगर की गलियों में अब यही चर्चा है—"अरे भैया, स्क्रिप्ट तो बहुत तगड़ी लिखी थी, लेकिन विलेन का रोल निभाने वाले खुद ही एक्सपोज हो गए!"
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0