अम्बेडकरनगर: दरवन झील को पौने तीन करोड़ के बजट से अति आधुनिक पिकनिक में करोड़ों का घोटाला

Oct 22, 2026 - 15:11
Oct 22, 2026 - 19:54
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अम्बेडकरनगर:  दरवन  झील को पौने तीन करोड़ के बजट से अति आधुनिक पिकनिक में करोड़ों का घोटाला
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अम्बेडकर नगर,अचल वार्ता। लखनऊ और अम्बेडकरनगर की जनता ज़रा दिल थामकर बैठिए क्योंकि जिस दरवन झील को पौने तीन करोड़ के बजट से अति आधुनिक पिकनिक स्पॉट बनाना था वो आज भी सिर्फ कागज़ों और ख़यालों में ही तैर रही है। 

 उत्तर प्रदेश शासन के उप सचिव संजीव कुमार श्रीवास्तव जी ने जब मुख्यमंत्री पर्यटन विकास सहभागिता योजना के तहत इस झील के कायाकल्प के लिए पूरे चौबीस हज़ार सात सौ लाख रुपये स्वीकृत किए थे तो लगा था कि अम्बेडकरनगर में जैसे पेरिस उतर आया है पर दो साल बीत जाने के बाद भी दरवन झील किसी चमत्कार की बाट ही जोह रही है।

  ज़रा सरकारी खज़ाने के इस चटपटे कच्चे चिट्ठे पर नज़र डालिए जहाँ तीन लाख अठहत्तर हज़ार में चमचमाती पार्किंग बननी थी और सोलह लाख चालीस हज़ार में खुशबूदार टॉयलेट रिम ब्लॉक नल और बिजली का इंतज़ाम होना था ताकि झील की पवित्रता और निर्मलता बनी रहे राह न भटकें इसलिए डेढ़ लाख के बोर्ड बनने थे पाँच लाख से ऊपर का टिकट काउंटर और झील किनारे रोमांटिक नज़ारे देखने वालों के लिए सैंतीस लाख से ज़्यादा का लकड़ी वाला बंगला बनना था केयरटेकर साहब के आराम के लिए उन्नीस लाख का कमरा बनना था और भूख मिटाने के लिए बत्तीस लाख से ज़्यादा का चाय समोसा पॉइंट यानी कैफेटेरिया बनना था सुरक्षा के लिए सात लाख की दीवार तीन लाख का इलेक्ट्रॉनिक गेट दो लाख की बाहरी बिजली और सड़तीस लाख से ज़्यादा की अन्य टूरिज्म सुविधाएँ तय हुई थीं। 

 इस पूरे दो सौ पांच लाख से ज़्यादा के खेल में आधी रकम पर्यटन विभाग की और आधी एनटीपीसी टांडा की जेब से आनी थी और पहली किस्त के रूप में साठ लाख रुपये पानी की तरह बहा भी दिए गए यूपी जल निगम को ठेका मिला था और नियम इतने कड़े थे कि पानी में पक्का मकान मत बनाना सोलर लाइट ही लगाना काम में देरी की तो सीधे जेल जाना और पंद्रह दिन में क्लोज़र रिपोर्ट न दी तो एफआईआर ठोक दी जाएगी।

 अब अम्बेडकरनगर की जनता पूछ रही है कि साहब दो साल बीतने के बाद दरवन झील में ऐसा कौन सा तिलिस्म हुआ है कि झील का रूप निखरने के बजाय किसी गंदे तालाब से भी बदतर हो गया है क्या वर्तमान जिलाधिकारी इशा प्रिया जी इस कागज़ी योजना को ज़मीन पर उतार पाएंगी या फिर करोड़पति बने लुटेरे अफसरों और ठेकेदारों की जेबें गर्म रहकर फाइलें ठंडे बस्ते में धूल चाटती रहेंगी आखिर जनता के खून पसीने की कमाई निगलने वाले इन ज़िम्मेदार आकाओं पर कोई गाज़ गिरेगी या आने वाला वक्त भी सिर्फ तमाशा बन कर रह जाएगा।

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