अम्बेडकर नगर : ई-ग्राम स्वराज या ई-गुप्त राज ? बसखारी में पासवर्ड के पीछे छुपा विकास का ‘वाउचर-विलाप’!

May 19, 2026 - 06:29
May 19, 2026 - 09:00
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अम्बेडकर नगर : ई-ग्राम स्वराज या ई-गुप्त राज ? बसखारी में पासवर्ड के पीछे छुपा विकास का ‘वाउचर-विलाप’!
  •  बिल-वाउचर पर लगा ताला, जनता पूछ रही ,भाई विकास हुआ है या सिर्फ निकासी ?

अम्बेडकरनगर, अचल वार्ता। विकास खण्ड बसखारी में इन दिनों “डिजिटल पारदर्शिता” का ऐसा नमूना देखने को मिल रहा है कि खुद कंप्यूटर भी शर्मा जाए! सरकार ने जिस ई-ग्राम स्वराज पोर्टल को पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए बनाया था, वहीं अब कुछ ग्राम सचिवों ने उसे “पासवर्ड प्रोटेक्टेड रहस्य लोक” बना दिया है। 

  मामला तब चर्चा में आया जब पोर्टल पर कार्यों के नाम तो दिखाई दिए, लेकिन उनसे जुड़े बिल-वाउचर ऐसे लॉक मिले मानो उनमें गांव का विकास नहीं, बल्कि किसी फिल्म का क्लाइमेक्स छिपा हो! सूत्रों के अनुसार ग्राम पंचायत हंसवर, हरसंहार, मुंडेरा, शंकरपुर बिशनपुर, टंडवा दरब, बेला परसा और लखनपुर सहित कई पंचायतों में बिल-वाउचर पासवर्ड से लॉक कर दिए गए हैं। आरोप है कि इससे जनता तो छोड़िए, शायद ऊपर वाले अधिकारी भी बिना “गुप्त कुंजी” के कुछ न देख पाएं। 

 चर्चा में आए ग्राम सचिवों में अभिषेक उपाध्याय, अनुज कुमार, शरद चंद कुमार, प्रवेश कुमार और पूजा चौरसिया, राजीव वर्मा के नाम प्रमुख रूप से बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुराने कार्यों को नया दिखाकर भुगतान निकाला जा रहा है, जबकि कई जगहों पर बिना दिनांक वाले कागज और संदिग्ध बिल अपलोड किए जाने की भी चर्चा है। ग्रामीण तंज कसते हुए कह रहे हैं — लगता है विकास कार्य नहीं, कोई वेब सीरीज चल रही है… जिसका अगला एपिसोड पासवर्ड डालने पर ही खुलेगा!”

  सरकार की मंशा थी कि जनता ऑनलाइन देख सके कि कौन-सा सामान कहां से खरीदा गया, कितना खर्च हुआ और किस कार्य पर पैसा लगा। लेकिन यहां तो हाल ऐसा है कि “ना बिल दिखे, ना भुगतान समझ आए — बस खाते से रकम उड़ जाए!” अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर यह “प्राइवेसी कवच” किसके आदेश पर लगाया गया? क्या यह तकनीकी सुरक्षा है या भ्रष्टाचार की डिजिटल चादर? गांवों में चर्चा गर्म है कि प्रधानों का कार्यकाल समाप्ति की ओर है, इसलिए “काम कम, भुगतान ज्यादा” का खेल तेज हो गया है।

  अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेते हैं या फिर ई-ग्राम स्वराज पोर्टल भ्रष्टाचारियों का “ई-तिजोरी पोर्टल” बनकर रह जाएगा।

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