ऑल इण्डिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य वी.पी. सिंह ने दिया देशवासियों ने नाम एक संदेश

- वरिष्ठ कांग्रेसी नेता वी.पी. सिंह ने देशवासियों के समक्ष रखा अपना वक्तव्य, दी शुभकामनाएं..
नई दिल्ली,सुलतानपुर। सदस्य, ऑल इण्डिया कांग्रेस कमेटी नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश के जनपद सुलतानपुर में स्थित विधानसभा क्षेत्र सदर जयसिंहपुर निवासी वीपी सिंह ने सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं ढेर सारी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि 15 अगस्त 1947 का दिन भारत के इतिहास में एक चिरस्मरणीय पल है। यह वहीं दिन है जब हमने अंग्रेजी हुकूमत के तानाशाही बेड़ियों को तोड़कर स्वतंत्रता की सांस ली। लेकिन हमें यह याद रखना होगा कि यह आजादी हमें यूंही नही मिली। बल्कि इस आजादी के लिए लाखों लोगों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। राष्ट्रपिता के निर्देशन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस स्वतंत्रता आंदोलन की रहनुमाई की और इस आंदोलन को जन-आंदोलन में बदल दिया। क्या बूढ़े, क्या बच्चे, क्या युवा, क्या महिलाएं सब अंग्रेजी साम्राज्यवाद के खिलाफ लड़ाई में अपना सर्वोच्च बलिदान देने हेतु पहलीं पंक्ति में खड़े हो गए। इस राष्ट्रीय आंदोलन में महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह की विचारधारा को बतौर हथियार बनाकर दुनियां को दिखाया कि हिंसा और हथियारों के दम पर ही नही बल्कि सत्य और नैतिकता के बल पर भी स्वतंत्रता हासिल की जा सकती है। दूसरी तरफ पण्डित जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रपिता के सानिध्य में आधुनिक, प्रगतिशील और समावेशी भारत का जो सपना देखा वो सदैव हमें प्रेरित करता रहेगा। राष्ट्रपिता के अनन्य शिष्य सरदार वल्लभभाई पटेल ने सभी रियासतों को एकजुट कर और तात्कालिक साम्प्रदायिक शक्तियों पर नकेल कसकर अखंड भारत की नींव रखी और हमे सिखाया कि कभी भी साम्प्रदायिक शक्तियों के सामने न झुकना है और न ही समझौता करना है। मौलाना आजाद, डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर और डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे नेताओं ने शिक्षा और संवैधानिक संस्थानों और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत किया। आज, 15 अगस्त 2025 को, हम उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिनके त्याग और बलिदानों के फलस्वरूप हमें आजादी मिली। आइए हम प्रण करें कि हम देश की विविधता को गले लगाएंगे, एकता को मजबूत करेंगे, साम्प्रदायिक सद्भाव को बढाएंगे और एक समृद्ध, न्यायपूर्ण भारत के निर्माण के लिए सतत प्रयास करते रहेंगे।
- श्रवण शर्मा
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