हापुड़ के 50 से ज्यादा गांवों में जल संकट: दूषित पानी से फैल रहीं गंभीर बीमारियां, हर साल जा रही दर्जनों जानें

हापुड़ जिले के 50 से अधिक गांवों में दूषित पेयजल से जलजनित बीमारियां फैल रही हैं। टाइफाइड, हेपेटाइटिस और कैंसर का खतरा बढ़ा, शुद्ध पानी का संकट गहराया।

Feb 4, 2026 - 10:52
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हापुड़ के 50 से ज्यादा गांवों में जल संकट: दूषित पानी से फैल रहीं गंभीर बीमारियां, हर साल जा रही दर्जनों जानें

हापुड़, अचल वार्ता:-

एक ओर सरकार गांव-गांव शुद्ध पेयजल और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के दावे कर रही है, वहीं उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले की जमीनी हकीकत इन दावों को आईना दिखा रही है। जिले के 50 से अधिक गांवों में आज भी ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि हर साल दर्जनों लोग असमय अपनी जान गंवा रहे हैं।

शुद्ध पानी और समय पर इलाज—दोनों से वंचित ग्रामीण:

ग्रामीण इलाकों में न तो शुद्ध पेयजल की व्यवस्था है और न ही समय पर समुचित इलाज मिल पा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी और जागरूकता के अभाव के कारण बीमारी की पहचान देर से हो रही है। मरीज जब तक शहर या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते हैं, तब तक उनकी हालत गंभीर हो चुकी होती है।

गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित:

पिछले दो वर्षों से जिले में बुखार और अन्य जलजनित बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ा है। गढ़मुक्तेश्वर तहसील, विशेषकर गंगा तट से सटे गांवों में सबसे अधिक मौतें दर्ज की गई हैं। हालांकि इन क्षेत्रों में डेंगू के मामले अपेक्षाकृत कम पाए गए, लेकिन टाइफाइड और हेपेटाइटिस के मरीजों की संख्या चिंताजनक है।

स्वास्थ्य विभाग की जांच में चौंकाने वाले खुलासे:

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शेरा कृष्णा वाली लठीरा, मढ़ैया, काकाठेर की मढ़ैया, नयाबांस, गढ़ावली, आरकपुर समेत कई गांवों का दौरा किया। जांच में सामने आया कि ज्यादातर मौतें दूषित पेयजल से फैलने वाले रोगों के कारण हुई हैं। सबसे अधिक मरीज टाइफाइड से पीड़ित पाए गए, जो सीधे तौर पर गंदे पानी से जुड़ी बीमारी है।

हर घर जल’ अभियान कागजों तक सीमित:

जांच के बाद जिला प्रशासन ने ‘हर घर जल’ अभियान को तेज करने और हर घर तक शुद्ध पानी पहुंचाने का दावा किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी जस के तस बने हुए हैं। कई गांवों में लोग महज 20 फीट गहराई से निकले अत्यधिक दूषित भूजल का उपयोग करने को मजबूर हैं।

टीडीएस 1500 के पार, पीने योग्य सीमा से तीन गुना ज्यादा:

ग्रामीणों के अनुसार, कई इलाकों में पानी का टीडीएस स्तर 1500 से भी अधिक दर्ज किया गया है, जबकि 500 से कम टीडीएस वाला पानी ही पीने योग्य माना जाता है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक गढ़मुक्तेश्वर, सिंभावली, धौलाना, पिलखुआ, हाफिजपुर और ब्रजघाट क्षेत्रों में भूगर्भ जल गंभीर रूप से दूषित हो चुका है।

कैंसर और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों का खतरा:

दूषित पानी के सेवन से टाइफाइड, हेपेटाइटिस, चर्म रोग, डायरिया, एलर्जी के साथ-साथ कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। कई परिवारों को इलाज के खर्च के लिए अपनी जमीन तक बेचनी पड़ी है।

स्वास्थ्य विभाग का दावा—योजना पर काम जारी:

स्वास्थ्य विभाग के डीएमओ ने बताया कि कई गांवों में जांच के बाद दूषित पानी से होने वाली बीमारियों की पुष्टि हुई है। पानी की गुणवत्ता की जांच की जा रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने के साथ-साथ शुद्ध पेयजल और स्वच्छता को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की योजना तैयार की जा रही है।

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