तेजस Mk1A डिलीवरी अपडेट: 5 स्वदेशी लड़ाकू विमान तैयार, IAF को इसी साल मिलेंगे
HAL ने 5 तेजस LCA Mk1A विमान तैयार किए, मिसाइल ट्रायल सफल। जानिए तेजस Mk1A की खूबियां, IAF की जरूरत और राफेल डील से जुड़ा पूरा अपडेट।
नई दिल्ली, अचल वार्ता।
भारतीय वायु सेना के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस LCA Mk1A की डिलीवरी में चली आ रही लंबी देरी अब खत्म होने वाली है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने पुष्टि की है कि 5 तेजस Mk1A विमान पूरी तरह तैयार हैं और उनके फायरिंग व मिसाइल ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं।
HAL जल्द ही इन विमानों की स्वीकृति प्रक्रिया के लिए भारतीय वायु सेना (IAF) से बातचीत करेगा और इन्हें इसी वित्तीय वर्ष में डिलीवर करने की योजना है।
इंजन की देरी बनी थी सबसे बड़ी बाधा
तेजस Mk1A की डिलीवरी में देरी का मुख्य कारण GE Aerospace से F404 इंजन की सप्लाई में विलंब था। अब यह समस्या धीरे-धीरे सुलझ रही है।
HAL के अनुसार, उपलब्ध इंजनों को 5 विमानों में फिट कर उन्हें पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। केवल कुछ छोटे तकनीकी परीक्षण शेष हैं, जिनके पूरा होते ही विमान IAF को सौंप दिए जाएंगे।
IAF को क्यों है तेजस Mk1A की सख्त जरूरत?
वर्तमान में भारतीय वायु सेना के पास स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन के मुकाबले केवल 29 सक्रिय स्क्वाड्रन ही हैं।
पुराने MiG-21 जैसे विमान रिटायर हो रहे हैं, जिससे वायु सेना की लड़ाकू क्षमता पर असर पड़ा है।
एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह कई बार तेजस Mk1A की तत्काल डिलीवरी की आवश्यकता पर जोर दे चुके हैं।
तेजस Mk1A क्यों है ज्यादा घातक?
तेजस Mk1A, पुराने Mk1 की तुलना में कहीं अधिक उन्नत है। इसमें शामिल हैं:
- AESA रडार
- उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम
- आधुनिक एवियोनिक्स
- एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग क्षमता
ये सभी फीचर्स इसे आधुनिक युद्ध के लिए अत्यंत सक्षम और घातक बनाते हैं।
180 तक जा सकता है तेजस का कुल ऑर्डर
HAL अब तक 83 तेजस Mk1A विमानों की डील हासिल कर चुका है, जबकि कुल ऑर्डर 180 तक पहुंचने की संभावना है।
डिलीवरी में देरी के चलते IAF ने फ्रांस से अतिरिक्त राफेल विमानों की डील पर भी बातचीत शुरू की थी। पहले से शामिल 36 राफेल विमानों ने वायु सेना की ताकत में बड़ा इजाफा किया है।
HAL चेयरमैन का बड़ा बयान
HAL चेयरमैन डी.के. सुनील ने कहा कि: “पहले पांच तैयार विमानों के बाद अब उत्पादन तेजी से बढ़ेगा। आने वाले समय में तेजस Mk1A भारतीय वायु सेना की रीढ़ साबित होगा।”
निष्कर्ष
तेजस Mk1A की डिलीवरी शुरू होना ‘आत्मनिर्भर भारत’ और भारतीय वायु शक्ति के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। यह न केवल स्क्वाड्रन की कमी को दूर करेगा, बल्कि भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को भी नई ऊंचाई देगा।
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