अम्बेडकर नगर : सील अस्पतालों पर मेहरबानी! डिग्री और पंजीयन नदारद, फिर भी धड़ल्ले से इलाज
अम्बेडकरनगर, अचल वार्ता। जनपद में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सर्जरी की डिग्री और वैध पंजीयन के बिना ही कई निजी अस्पताल और नर्सिंग होम खुलेआम संचालित हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन अस्पतालों को पहले सील किया जा चुका था, वे भी अब कथित मिलीभगत के चलते दोबारा चालू हो गए हैं।सूत्रों के मुताबिक, विभागीय अफसरों और लिपिकों की सांठगांठ से इन अवैध अस्पतालों का संचालन जारी है।
कई स्थानों पर अस्पतालों के बाहर कोई बोर्ड तक नहीं लगा है, जिससे उनकी वैधता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इसके बावजूद मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करते हुए यहां इलाज और सर्जरी तक की जा रही है।बताया जाता है कि दो माह पहले राजेसुल्तानपुर, बसखारी, नगहरा, नसीरपुर और जहांगीरगंज क्षेत्रों में 11 से अधिक अवैध अस्पतालों को सीएमओ द्वारा सील किया गया था।
लेकिन अब कई संचालकों ने नाम और स्थान बदलकर फिर से संचालन शुरू कर दिया है। इसमें आशा और एएनएम जैसे कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है।वहीं, कनेला बाजार, नरियांव बाजार और बावली चौक जैसे इलाकों में एक ही नाम से कई अस्पताल संचालित होने की बात सामने आई है। इनमें से कुछ को विभाग से लाइसेंस तक नहीं मिला, फिर भी पीछे के रास्ते से इलाज का काम जारी है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बिना अनुमति कोई भी सील अस्पताल दोबारा नहीं खोला जा सकता। अवैध संचालन की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी और सभी नोडल अधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है।फिलहाल सवाल यह उठता है कि जब विभाग को सब कुछ पता है, तो फिर इन अवैध अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या मरीजों की जान यूं ही जोखिम में डाली जाती रहेगी या जिम्मेदारों पर भी गाज गिरेगी?
-अमित प्रजापति
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