अम्बेडकरनगर: डायल 112 के सिपाही बने ठगों के रक्षक, दो लाख की ठगी में खाकी पर दाग
अम्बेडकर नगर के राजेसुल्तानपुर क्षेत्र में डायल 112 पर तैनात दो सिपाहियों की संलिप्तता से दो लाख रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है। पुलिस ने दोनों को निलंबित कर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि एक आरोपी फरार है।
अम्बेडकर नगर (आलापुर),अचल वार्ता।जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिस खाकी वर्दी पर टिकी होती है, जब वही वर्दी अपराधियों की ढाल बन जाए तो कानून की साख पर सवाल उठना स्वाभाविक है। राजेसुल्तानपुर थाना क्षेत्र से सामने आया मामला पुलिस महकमे के भीतर चल रहे काले खेल की गंभीर तस्वीर पेश करता है, जहां डायल 112 पर तैनात दो सिपाही ठगी के मामले में सीधे तौर पर शामिल पाए गए।
सस्ते सोने का झांसा देकर दो लाख की ठगी
मामला 13 जनवरी 2026 का है। गोरखपुर निवासी एक व्यक्ति को सस्ते सोने का लालच देकर दो लाख रुपये की ठगी की गई। सौदा तय होने के बाद पीड़ित को जो बैग सौंपा गया, उसमें सोने के बजाय नकली नोट निकले। ठगी का एहसास होते ही जब पीड़ित ने आरोपियों का पीछा किया, तभी मौके पर बिना नंबर प्लेट की बाइक से डायल 112 पर तैनात सिपाही आदर्श यादव और अनिल यादव पहुंच गए।
कानून का भय दिखाकर ठगों को दिलाई सुरक्षा
आरोप है कि दोनों सिपाहियों ने कानून का भय दिखाकर पीड़ित को चुप कराने की कोशिश की और ठगों को सुरक्षित निकलने में मदद की। पीड़ित की तहरीर पर जब मामले की जांच आगे बढ़ी तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में स्पष्ट हुआ कि दोनों सिपाही केवल मौके पर मौजूद नहीं थे, बल्कि ठगी की पूरी साजिश में उनकी भूमिका सक्रिय और संदिग्ध थी।
वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में आते ही मचा हड़कंप
मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। अपर पुलिस अधीक्षक श्यामदेव ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए त्वरित जांच के आदेश दिए। आरोप प्रमाणित होने पर दोनों सिपाहियों को तत्काल निलंबित कर गिरफ्तार किया गया और न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
एक आरोपी जेल में, दूसरा फरार
इस प्रकरण में मुख्य आरोपी प्रमोद कुमार सिंह को पहले ही जेल भेजा जा चुका है, जबकि दूसरा आरोपी वीरेंद्र वर्मा फरार है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।
खाकी पर लगा दाग, सिस्टम पर सवाल
यह मामला केवल ठगी तक सीमित नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है, जहां कुछ वर्दीधारी कानून के रक्षक नहीं, बल्कि अपराध के साझेदार बन जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सक्रिय और सख्त अधिकारियों के दायरे में भी ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, तो आम जनता का भरोसा टूटना स्वाभाविक है।
हालांकि पुलिस प्रशासन निष्पक्ष जांच का दावा कर रहा है और यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि अपराध चाहे वर्दी में हो या बिना वर्दी, कानून की पकड़ से कोई नहीं बचेगा।
लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है—कितने चेहरे आज भी वर्दी की आड़ में कानून को चुनौती दे रहे हैं?
- हरीलाल प्रजापति
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