अम्बेडकर नगर: सीमेंट की बोरी में कीटनाशक, और हार्डवेयर की दुकान से जलपान! भरहा ग्राम सभा में ‘मल्टीटैलेंटेड’ वाउचर का कमाल

Feb 12, 2026 - 09:30
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अम्बेडकर नगर: सीमेंट की बोरी में कीटनाशक, और हार्डवेयर की दुकान से जलपान! भरहा ग्राम सभा में ‘मल्टीटैलेंटेड’ वाउचर का कमाल

अंबेडकरनगर, अचल वार्ता। कहते हैं हिंदुस्तान में प्रतिभा की कमी नहीं है—बस उसे पहचानने की जरूरत है। विकास खंड टांडा की ग्राम सभा भरहा ने तो मानो यह साबित कर दिया कि एक ही फर्म अगर ठान ले, तो सीमेंट से लेकर कीटनाशक और स्टेशनरी तक सब कुछ सप्लाई कर सकती है—वो भी एक ही वाउचर पर! मामला ई-ग्राम स्वराज पोर्टल से जुड़ा है, जहां कागजों में (या कहें स्क्रीन पर) ऐसा अद्भुत समन्वय देखने को मिला कि हार्डवेयर की फर्म से कीटनाशक दवाइयां, राबिस (ईंट की राख), मीटिंग का जलपान और स्टेशनरी तक की खरीद दिखा दी गई। अब यह “वन स्टॉप सॉल्यूशन” है या “वन क्लिक पेमेंट”, यह जांच का विषय है। आरोपों के अनुसार संबंधित फर्म का पंजीकरण हार्डवेयर और निर्माण सामग्री—जैसे सीमेंट, पाइप, पंप आदि—के लिए है। लेकिन कागजों में कीटनाशक दवाओं की बिक्री भी दर्शाई गई। कृषि विभाग के नियम कहते हैं कि कीटनाशक बेचने के लिए अलग से पेस्टीसाइड लाइसेंस चाहिए। ऐसे में ग्रामीण पूछ रहे हैं—क्या सीमेंट की बोरी खोलते ही मच्छर भी भाग जाते हैं?

इतना ही नहीं, ग्राम सभा की बैठकों में जलपान और स्टेशनरी की खरीद भी उसी हार्डवेयर फर्म से दिखाई गई। मतलब अब कील-स्क्रू के साथ बिस्किट और रजिस्टर भी मिल रहे हैं! अगर यही रफ्तार रही तो अगली बार शायद पाइप के साथ चाय का थर्मस और सीमेंट के साथ समोसे भी पैक होकर आएं। जांच में यह भी सामने आने की बात कही जा रही है कि कई भुगतान ऐसे कार्यों के लिए हुए, जिनमें यह स्पष्ट नहीं कि कौन-सी सामग्री लगी। यानी काम का नाम मौजूद, पर सामान का नाम गुम। जैसे फिल्म का पोस्टर तो लगा हो, पर हीरो-हीरोइन का पता न हो। सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि कुछ बिलों पर ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव के हस्ताक्षर तक नहीं हैं, फिर भी भुगतान हो गया। जबकि नियमों के मुताबिक ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अनुमोदन के बाद ही भुगतान संभव है। अब सवाल उठ रहा है—क्या पोर्टल ने खुद ही आत्मनिर्भर बनकर भुगतान कर दिया?

ग्रामीणों में इस पूरे प्रकरण को लेकर नाराजगी बताई जा रही है। उनकी मांग है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच हो, संबंधित फर्म की पात्रता की समीक्षा की जाए और यदि अनियमितताएं प्रमाणित हों तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

फिलहाल भरहा ग्राम सभा का यह मामला चर्चा में है—जहां सीमेंट, कीटनाशक और जलपान ने मिलकर प्रशासनिक “मिक्स डिज़ाइन” का नया मॉडल पेश कर दिया है। अब देखना यह है कि जांच की कंक्रीट डाली जाती है या मामला भी रेत की तरह हाथ से फिसल जाता है।

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