अम्बेडकर नगर: ग्राम पंचायत कजपुरा में करोड़ों के कथित घोटाले का आरोप, प्रशासन के लिए बनी चुनौती
अम्बेडकर नगर के ग्राम पंचायत कजपुरा में करोड़ों रुपये के कथित घोटाले का मामला सामने आया। ग्राम प्रधान अफसाना बानो और अन्य अधिकारियों पर विकास कार्यों में फर्जी बिल, अप्रमाणित वाउचर और मस्टर रोल के जरिए भुगतान कराने का आरोप। जिला प्रशासन की कार्रवाई पर ग्रामीणों की नजरें टिकी हुई हैं।
ग्राम पंचायत कजपुरा में करोड़ों के कथित घोटाले का आरोप, प्रशासन की निष्पक्षता पर उठे सवाल
अम्बेडकर नगर, अचल वार्ता। जनपद अम्बेडकर नगर के विकास खण्ड जलालपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत कजपुरा में करोड़ों रुपये के कथित घोटाले का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। ग्राम प्रधान का कार्यकाल समाप्ति की ओर है, लेकिन उससे पहले पंचायत में हुए कथित भ्रष्टाचार को लेकर शिकायतों का अंबार लग गया है। यह मामला अब जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनता नजर आ रहा है।
ग्राम प्रधान, सचिव व अधिकारियों पर गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता सत्यम श्रीवास्तव ने ग्राम प्रधान अफसाना बानो, ग्राम सचिव दिवाकर वर्मा, खण्ड विकास अधिकारी जलालपुर एवं संविदा कनिष्ठ अभियंता सबी जेहरा पर विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त अभिलेखों व शपथपत्र के माध्यम से जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
फर्जी बिल, अप्रमाणित वाउचर और मस्टर रोल का आरोप
शिकायत के अनुसार, पिछले लगभग तीन वर्षों में ग्राम पंचायत में हैंडपंप मरम्मत, रिबोर, नाली निर्माण, इंटरलॉकिंग सड़क, स्ट्रीट लाइट, वृक्षारोपण एवं मनरेगा कार्यों के नाम पर कूटरचित बिल, अप्रमाणित वाउचर और फर्जी मस्टर रोल के जरिए लाखों रुपये का भुगतान कराया गया।
आरोप है कि मेसर्स आरुषि इंटरप्राइजेज, हीरा ब्रिक फील्ड, कोमल कंस्ट्रक्शन, सिंह बिल्डिंग मैटेरियल सहित कई फर्मों के ऐसे बिलों पर भुगतान किया गया जिनमें
- तिथि का उल्लेख नहीं,
- जीएसटी विवरण नहीं,
- माप पुस्तिका का अभाव,
कार्य स्थल और सामग्री का स्पष्ट विवरण नहीं है।
कुछ मामलों में एक ही कार्य के लिए अलग-अलग दस्तावेजों में भिन्न-भिन्न माप और लागत दर्शाई गई है।
हैंडपंप व स्ट्रीट लाइट में भारी अनियमितता का दावा
शिकायतकर्ता का आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में हैंडपंप मरम्मत और रिबोर के नाम पर हर माह हजारों से लेकर लाखों रुपये तक का भुगतान किया गया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि धनराशि किन कार्यों या सामग्रियों में खर्च हुई।
स्ट्रीट लाइट के मामले में तो ग्राम पंचायत कादीपुर के प्रपत्रों में काट-छांट कर उन्हें ग्राम पंचायत कजपुरा का बताकर लगभग दो लाख रुपये का भुगतान कराने का आरोप भी लगाया गया है।
मनरेगा व निर्माण कार्य केवल कागजों में!
नाली निर्माण, मिट्टी पटाई, इंटरलॉकिंग सड़क, ह्यूम पाइप, वृक्षारोपण और मनरेगा कार्यों में फर्जी हाजिरी, फोटो और मस्टर रोल के जरिए भुगतान लेने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि कई कार्य केवल कागजों में दर्शाए गए हैं, जबकि जमीनी स्तर पर उनका कोई अस्तित्व नहीं है।
सूचना आयोग तक पहुंचा मामला
सूचना न मिलने पर शिकायतकर्ता ने पहले जिला विकास अधिकारी के समक्ष प्रथम अपील और बाद में राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की। राज्य सूचना आयोग के हस्तक्षेप के बाद प्राप्त अभिलेखों में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया है।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इन व्यापक और गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की नजरें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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