हरिद्वार : 07 माह के बच्चे के अपहरण में दिव्यांग महिला समेत दो गिरफ्तार
हरिद्वार ,अचल वार्ता। हरिद्वार के कोतवाली कलियर में वादिया कलसूम खातून पत्नी मौ0 नजीर निवासी मुसीड़ा थाना चरौथ जिला सीतामणी बिहार हाल निवासी कलियर दरगाह परिसर ने थाने पर लिखित सूचना दी कि 07 जून को नमाज अदा के दौरान कोई अज्ञात व्यक्ति उसके 07 माह के नाती अली रजा को दरगाह परिसर से कहीं ले गया है।
शिकायतकर्ता महिला करीब 09 महीने पहले से अपनी दिमागी रुप से अस्वस्थ लड़की रजिया खातून पत्नी असमत, लडके खुशराज पुत्र मौ० नजीर तथा नाती मौहम्मद अली रजा पुत्र असमत उम्र 7 माह को लेकर नई बस्ती कलियर में किराये पर रह रहे थे जो रोज हाजिर के लिए दरगाह में आती थी।
प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी नवनीत सिंह ने खुलासे के लिए पुलिस टीम गठित की गयी। गठित टीम ने दरगाह परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज का अवलोकन करने पर घटना के दिन एक संदिग्ध व्यक्ति बच्चे को गोद में लेकर बाहर आता हुआ दिखाई दिया। आवाजाही के संभावित मार्गों से सबूत खंगाल कर पुलिस टीम ने एक संदिग्ध दिव्यांग महिला व उपरोक्त संदिग्ध पुरुष को चिन्हित कर स्थानीय लोगों से संदिग्धों की पहचान के प्रयास करने के साथ ही मुखबिर तंत्र को एक्टिव किया। पहचान के लिए सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल किया गया।
सामने आए सभी छोटे बड़े तथ्यों को एकसार कर टीम ने मैनुअल पुलिसिंग की मदद से 11 जून को मुखबिर की सूचना पर लक्सर रेलवे स्टेशन के पास से एक दिव्यांग महिला और समीर नामक युवक को बच्चे का उपयोग कर भीख मांगते हुए पकड़ा। दिव्यांग महिला की बैसाखी व गोद में रखे बच्चे की दोनों हाथों में 6-6 उंगलियां देख टीम ने सुनिश्चित किया कि यह वही बच्चा है जिसका कलियर से अपहरण किया गया था। टीम ने दोनों संदिग्ध को हिरासत में लिते हुए उनके कब्जे से अपहृत बच्चे मौ0 अलीरजा को सकशुल बरामद।
गहनता से पूछताछ करने पर दिव्यांग महिला ने बताया कि वह बचपन से पोलियो ग्रस्त है और करीब 20 साल पहले पति कि मौत होने के बाद वह भीक्षावृत्ति करने लगी। करीब 02 साल से वह सह आरोपी समीर उर्फ सोनू उर्फ बड़ा के संपर्क में थी। समीर के जरीए पिरान कलियर दरगाह में भीख मांगने पर अच्छे पैसे मिलने की बात पता चलने पर वह समीर के साथ कलियर आकर भीख मांगने लगी। इस दौरान छोटे –छोटे बच्चों को गोद में लेकर भीख मांग रही महिलाओं को अच्छा पैसा मिलता देख दोनों ने दरगाह परिसर से बच्चा चुराने की योजना बनाई।
तय योजना के तहत करीब एक हफ्ते तक एक मानसिक रुप से कमजोर महिला और उसके बच्चे पर नजर रखने के बाद समीर ने दिव्यांग महिला को लण्ढौरा छोड़ दिया व खुद कलियर दरगाह वापस आकर अगले दिन 07 जून की शाम बच्चे का अपहरण कर खुद भी लण्ढोरा पहुंच गया। बच्चे को गोद में रखकर भीख में ज्यादा पैसे कमाने का लालच था लेकिन हरिद्वार पुलिस ने उनकी योजनाओं पर पानी फेर एक मां को उसका बच्चा सकुशल वापस लौटा दिया।
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