अम्बेडकर नगर: बसखारी ब्लॉक में विकास नहीं, ‘जादुई गायब’ योजना चालू

Feb 12, 2026 - 09:34
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अम्बेडकर नगर: बसखारी ब्लॉक में विकास नहीं, ‘जादुई गायब’ योजना चालू

935 716 का फंड बना अलादीन का चिराग, काम कहीं – भुगतान कहीं

अम्बेडकरनगर, अचल वार्ता। जनपद के बसखारी विकास खंड में इन दिनों विकास नहीं बल्कि विकास का गायब होना चर्चा का विषय बना हुआ है। जब से नए खंड विकास अधिकारी ने चार्ज संभाला है, तब से ब्लॉक में विकास के पैसों का ऐसा बंदरबांट हो रहा है कि बंदर भी शरमा जाए।

मामला ब्लॉक प्रमुख नरेंद्र मोहन उर्फ संजय सिंह की निधि से जुड़े एक कथित विकास कार्य का है। विकास खंड परिसर के सुंदरीकरण के नाम पर 2022-23 में पूरे ₹935716 रुपये ऐसे गायब हो गए, जैसे अलादीन के जादुई चिराग ने रगड़ खाते ही “छू मंतर” कर दिया हो।

काम की आईडी कुछ… भुगतान का नाम कुछ!

कागज़ों में खेल ऐसा कि अच्छे-अच्छे खिलाड़ी फेल हो जाएं।

काम की आईडी बताई गई बीडीओ आवास के बगल गैराज निर्माण की।

लेकिन भुगतान हो गया विकासखंड परिसर सुंदरीकरण के नाम पर।

यानि काम कहीं, पैसा कहीं और! अगर इसे “क्रिएटिव अकाउंटिंग” कहा जाए तो भी कम ही होगा।

 सुंदरीकरण हुआ या सिर्फ फाइलें सजीं?

सबसे दिलचस्प बात यह है कि विकासखंड परिसर में सुंदरीकरण के नाम पर आखिर हुआ क्या?

कौन सा फव्वारा लगा?

कौन सी सड़क चमकी?

कौन सी दीवार मुस्कराई?

इसका जवाब न ज़मीन पर है, न फाइलों के बाहर। पूरा मामला “देखा तो नहीं, पर भुगतान हो गया” जादूई की तर्ज़ पर दिख रहा है।

 गठजोड़ का खेल और जेबों का विकास

विकासखंडअधिकारी,ठेकेदार,और ब्लॉक प्रमुख नरेंद्र मोहन उर्फ संजय सिंह तीनों का गठजोड़ है, और ब्लॉक प्रमुख निधि से आए पैसों से जनता का नहीं, जेबों का विकास किया जा रहा है।

अंधेर नगरी चौपट राजा’ की सजीव मिसाल? और स्थानीय लोग इसे हंसवर स्टेट के ब्लॉक प्रमुख नरेंद्र मोहन उर्फ संजय सिंह पर एकदम फिट बैठता बता रहे हैं।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि,

क्या जिला अधिकारी इस पूरे मामले को गंभीरता से लेंगे?

या फिर सत्ता पक्ष के ब्लॉक प्रमुख होने के कारण मामला फाइलों में ही ‘सुंदरीकरण’ होता रहेगा?

क्या इस कथित खेल की जांच सिर्फ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ही कर सकते हैं? बसखारी ब्लॉक में इन दिनों यही सवाल गलियों से लेकर चौपाल तक चर्चा का विषय बने हुए हैं।

जनता पूछ रही है,

“विकास की कुर्सी पर बैठकर विनाश आख़िर कब तक?”

- अमित प्रजापति 

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