पीलीभीत: धान खरीद में खेल, मंडी में टीनशेड खाली, हजारों कुंतल बाकी, जांच की मांग तेज
पीलीभीत के पूरनपुर मंडी समिति में धान खरीद सत्र के दौरान बड़े घोटाले के आरोप लगे हैं। केंद्र खाली हैं, जबकि कागजों में हजारों कुंतल खरीद दर्ज है।
- धान खरीद सत्र में बड़े घोटाले के आरोप, पूरनपुर मंडी समिति में केंद्र खाली, कागजों में हजारों कुंतल खरीद
पीलीभीत, अचल वार्ता। जनपद पीलीभीत में इस वर्ष के धान खरीद सत्र को लेकर गंभीर अनियमितताओं और बड़े घोटाले के आरोप सामने आ रहे हैं। पूरनपुर कृषि उत्पादन मंडी समिति में यूपीएसएस, पीसीयू, पीसीएफ समेत अन्य क्रय एजेंसियों के अधिकांश खरीद केंद्रों पर टीनशेड खाली पड़े हैं, जबकि सरकारी कागजों में हजारों कुंतल धान की खरीद और चावल कुटाई के लिए राइस मिलों को भेजे जाने का रिकॉर्ड दर्ज है।
केंद्रों पर धान नदारद, रिकॉर्ड में भारी खरीद
धान खरीद सत्र 3 अक्टूबर से शुरू हुआ था, लेकिन एजेंसियों द्वारा 31 जनवरी से पहले ही केंद्रों पर खरीद बंद कर दी गई। इसके बावजूद अंतिम चरण में खरीद और डिस्पैच के आंकड़ों में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।
आरोप है कि खरीद के शुरुआती दिनों में किसानों को धान में नमी बताकर क्रय केंद्रों से लौटा दिया गया। मजबूरी में किसानों ने अपना धान राइस मिलों और आढ़तियों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दामों पर बेच दिया। बाद में उसी धान को कागजों में मंडी व ग्रामीण केंद्रों पर दिखाकर खरीद दर्ज कर ली गई।
अंगूठा लगवाकर फर्जी खरीद की चर्चा
कई केंद्रों पर अंगूठा लगवाकर फर्जी खरीद किए जाने की भी चर्चा है। मंडी समिति में नाममात्र का धान डिस्पैच के लिए दिखाया गया, जबकि वास्तविक स्टॉक पहले से ही राइस मिलों के परिसर में रखे होने का आरोप है।
इसके अलावा जीपीएस लगे ट्रकों की आवाजाही भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।
किसानों को नहीं मिला MSP : भाकियू
भारतीय किसान यूनियन (राजनीतिक) के जिला अध्यक्ष मंजीत सिंह ने इसे जनपद का अब तक का सबसे बड़ा धान घोटाला करार दिया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष वास्तविक किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से वंचित रह गया।
उनका आरोप है कि बाहरी खरीद केंद्रों पर लगभग 99 प्रतिशत तक फर्जी खरीद दर्शाई गई है। अधिकांश धान पहले से ही राइस मिलों में रखा गया, जिसे बाद में सरकारी खरीद में प्रवर्तित दिखा दिया गया।
जांच और रिकवरी की मांग
भाकियू नेता ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और घोटालेबाजों से सरकारी धन की रिकवरी की मांग की है।
प्रशासन का पक्ष
इस मामले पर डिप्टी आरएमओ विजय कुमार शुक्ला ने कहा कि जिले में अब बहुत कम धान शेष है।
उन्होंने बताया,
“कल तक लगभग 15 हजार कुंतल धान बाकी था। बोरे मिलने लगे हैं। यदि कहीं भी लापरवाही या अनियमितता पाई गई तो जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल
पूरनपुर मंडी समिति से जुड़ा यह मामला अब धान खरीद व्यवस्था की विश्वसनीयता और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न बन गया है। किसानों की निगाहें अब संभावित जांच और कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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