भारतीय नौसेना बनी संकट में साथी, समुद्री कूटनीति में भारत की बढ़ती ताकत
मानवीय सहायता, बहुपक्षीय अभ्यास और मैरीटाइम डिप्लोमेसी के जरिए भारतीय नौसेना बनी क्षेत्रीय भरोसे का केंद्र। जानिए 2025 में नौसेना की बड़ी उपलब्धियां।
नई दिल्ली, अचल वार्ता। भारतीय नौसेना बीते कुछ वर्षों में केवल एक सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह संकट में भरोसेमंद साथी और क्षेत्रीय समुद्री कूटनीति की मजबूत धुरी बनकर उभरी है। उत्तरी अरब सागर से लेकर दक्षिण चीन सागर तक भारतीय नौसेना ने मानवीय सहायता, आपदा राहत और विश्वास-निर्माण अभियानों के जरिए अपनी वैश्विक छवि को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।
सुरक्षा से आगे बढ़ी भारत की समुद्री सोच
भारत की समुद्री रणनीति अब केवल राष्ट्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रही। यह साझा क्षेत्रीय जिम्मेदारी, सहयोग और स्थिरता पर केंद्रित हो चुकी है।
भारतीय नौसेना ने द्विपक्षीय व बहुपक्षीय युद्धाभ्यास, संयुक्त पेट्रोलिंग और EEZ निगरानी अभियानों के माध्यम से क्षेत्रीय देशों के साथ सहयोग को मजबूती दी है।
2025 में नौसेना की प्रमुख गतिविधियां
- 18 द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास
- 8 बहुपक्षीय अभ्यास
- 31 मैरीटाइम पार्टनरशिप गतिविधियां
- मानवीय सहायता और आपदा राहत में अग्रणी
भारतीय नौसेना ने बार-बार यह साबित किया है कि वह संकट में सबसे पहले पहुंचने वाली ताकत है।
मार्च 2025 में म्यांमार और थाईलैंड में आए भूकंप, श्रीलंका में चक्रवात और मालदीव संकट के दौरान नौसेना ने:
राहत सामग्री भेजी
मेडिकल टीम और इंजीनियरिंग सहायता उपलब्ध कराई यहां तक कि पाकिस्तानी नाविक की जान बचाने जैसे मानवीय मिशन भी अंजाम दिए गए।
जून 2025 में केरल तट के पास आग लगी चीनी जहाज एमवी वान हाई 503 से लोगों को बचाना नौसेना की त्वरित कार्रवाई का बड़ा उदाहरण रहा।
क्षमता निर्माण और क्षेत्रीय साझेदारी
भारतीय नौसेना ने क्षेत्रीय देशों की समुद्री क्षमताएं बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई है। प्रमुख कदमों में शामिल हैं:
- श्रीलंका में मैरीटाइम रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर की स्थापना
- वियतनाम और मोजाम्बिक को जहाजों का हस्तांतरण
- समुद्री निगरानी और सूचना साझा करने में सहयोग
- इन पहलों ने समुद्री सुरक्षा को साझा जिम्मेदारी का स्वरूप दिया है।
मैरीटाइम डिप्लोमेसी का नया चेहरा
आईएनएस दिल्ली, सतपुड़ा, किल्तान और शक्ति जैसे युद्धपोतों की विदेशी बंदरगाह यात्राओं ने भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और भरोसे का संदेश दिया।
2018 में गुरुग्राम में स्थापित IFC-IOR आज भारतीय नौसेना को क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा का “नर्व सेंटर” बनाता है, जो: 25+ देशों 57 समुद्री सुरक्षा संगठनों के साथ तालमेल रखता है।
बहु-ध्रुवीय अभ्यास और संतुलित कूटनीति
2025 में भारतीय नौसेना ने कई महत्वपूर्ण बहु-ध्रुवीय कूटनीतिक कदम उठाए, जिनमें शामिल हैं:
फ्रांस के चार्ल्स द गॉल स्ट्राइक ग्रुप के साथ “वरुण” अभ्यास
रूस के साथ INDRA अभ्यास
मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भागीदारी
ये प्रयास दर्शाते हैं कि समुद्री शक्ति केवल फायरपावर से नहीं, बल्कि भरोसे और साझेदारी से बनती है।
निष्कर्ष
दक्षिण चीन सागर से हिंद महासागर तक भारतीय नौसेना का बढ़ता प्रभाव यह साफ संदेश देता है कि भारत आज सिर्फ समुद्री सुरक्षा प्रदाता नहीं, बल्कि मानवीय सहायता, सहयोग और समुद्री कूटनीति का भरोसेमंद स्तंभ बन चुका है।
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