भारत-अमेरिका व्यापार समझौता 2026: ट्रंप-मोदी डील पर सियासी घमासान, कांग्रेस का तीखा हमला

Donald Trump ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा की। टैरिफ घटाने, रूसी तेल और 500 अरब डॉलर की डील पर कांग्रेस ने उठाए सवाल। पढ़ें पूरी खबर।

Feb 3, 2026 - 19:59
 0  0
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता 2026: ट्रंप-मोदी डील पर सियासी घमासान, कांग्रेस का तीखा हमला

नई दिल्ली | अचल वार्ता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत-अमेरिका के बीच एक बड़े व्यापार समझौते की घोषणा के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। ट्रंप ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर हुई बातचीत के बाद यह डील फाइनल हुई है, जिसके तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क (टैरिफ) को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा।

डील की प्रमुख शर्तें क्या हैं?

इस समझौते के अनुसार—

  • अमेरिका भारतीय सामानों पर टैरिफ 25% से घटाकर 18% करेगा
  • भारत रूसी तेल की खरीद कम/बंद कर अमेरिका और वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाएगा
  • भारत अमेरिका से करीब 500 अरब डॉलर के उत्पाद खरीदेगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे ‘मेड इन इंडिया’ के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।

कांग्रेस का हमला: रणनीतिक स्वतंत्रता से समझौता

हालांकि विपक्षी दल कांग्रेस ने इस डील को भारत के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बताया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति और व्यापारिक फैसलों की घोषणा अब नई दिल्ली के बजाय वॉशिंगटन से हो रही है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप के सामने “घुटने टेक दिए” हैं और यह समझौता भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के लिए खतरनाक साबित होगा। रमेश ने कटाक्ष करते हुए कहा कि वॉशिंगटन में यह धारणा बन गई है कि “मोगैंबो खुश है”, जो अमेरिका की शर्तों के भारत पर थोपे जाने का संकेत देता है।

मनीष तिवारी के सवाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने भी समझौते की शर्तों पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि—

  • यदि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदना बंद करता है
  • और अमेरिका के लिए 500 अरब डॉलर का बाजार खोलता है
  • तो फिर भारत की रणनीतिक स्वायत्तता कहां रह जाएगी?

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात पर अब भी 18% टैरिफ लगेगा, जबकि अमेरिका से आने वाले उत्पादों को भारत में रियायतें मिलेंगी, जिससे यह सौदा एकतरफा प्रतीत होता है।

आर्थिक विशेषज्ञों की राय: निर्यातकों को बड़ी राहत

वहीं आर्थिक विशेषज्ञ इस समझौते को भारतीय उद्योगों के लिए फायदेमंद मान रहे हैं। उनका कहना है कि—

  • भारत पर 18% टैरिफ
  • वियतनाम और बांग्लादेश पर 20%
  • जबकि चीन पर 34% टैरिफ

इस तुलना में भारत को वैश्विक बाजार में बड़ी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। इससे चमड़ा, कपड़ा, हीरा और निर्यात आधारित उद्योगों को खासा लाभ हो सकता है, जो लंबे समय से ऊंचे टैरिफ से जूझ रहे थे।

सरकार का दावा:सरकार का तर्क है कि यह समझौता—

भारत-अमेरिका व्यापार संतुलन को मजबूत करेगा

भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा

निष्कर्ष

फिलहाल यह व्यापार समझौता देश में आर्थिक लाभ बनाम रणनीतिक स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ चुका है। आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़

क तक इस डील पर सियासी घमासान और तेज होने की संभावना है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0