मुलुग में एशिया का सबसे बड़ा आदिवासी महाकुंभ संपन्न, 2 करोड़ श्रद्धालु
तेलंगाना के मुलुग जिले के मेदाराम में एशिया का सबसे बड़ा आदिवासी महाकुंभ संपन्न हुआ। चार दिन चले आयोजन में करीब 2 करोड़ श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
मुलुग, अचल वार्ता
तेलंगाना के मुलुग जिले में स्थित मेदाराम क्षेत्र में एशिया का सबसे बड़ा आदिवासी महाकुंभ सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। चार दिन तक चले इस भव्य आयोजन में करीब 2 करोड़ श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त किया। शनिवार को जम्पन्ना वागु नदी की तलहटी पर इस ऐतिहासिक महाकुंभ का समापन हुआ।
आदिवासी महाकुंभ की सबसे खास बात यह है कि यहां न तो कोई मंदिर है और न ही किसी देवी-देवता की मूर्ति स्थापित की जाती है। इस महाकुंभ में प्रकृति, जंगल, नदी और धरती की पूजा की जाती है, जो आदिवासी संस्कृति और परंपराओं की गहराई को दर्शाता है।
प्रकृति पूजा का अनोखा संगम
मेदाराम महाकुंभ में देश के विभिन्न राज्यों—तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा और मध्य प्रदेश—से लाखों श्रद्धालु पहुंचे। इसे प्रयागराज कुंभ के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक समागम माना जाता है।
12वीं सदी से जुड़ा है इतिहास
इतिहासकारों के अनुसार, इस आदिवासी महाकुंभ की शुरुआत 12वीं सदी में हुई थी। यह आयोजन हर दो साल में एक बार आयोजित किया जाता है। मान्यता है कि इस मेले में भाग लेने से सुख-समृद्धि और प्राकृतिक संतुलन बना रहता है।
व्यवस्था और सुरक्षा रही चाक-चौबंद
महाकुंभ के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, यातायात और पेयजल की व्यापक व्यवस्था की थी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बावजूद आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।
मुलुग का यह आदिवासी महाकुंभ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह भारत की आदिवासी संस्कृति, परंपरा और प्रकृति से जुड़ाव का जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।
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