तेज रफ्तार ने ली पत्रकार की जान
ओयल, लखीमपुर में तेज रफ्तार वाहन का कहर, पत्रकार की मौके पर मौत। लगातार हो रहे हादसों के बीच हाईवे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल, स्थानीय लोग कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
हाईवे बना मौत का जाल! पत्रकार की जान गई, जिम्मेदार अब भी बेखबर
लखीमपुर खीरी , अचल वार्ता। कस्बा ओयल के मोहल्ला एकतानगर निवासी तेजतर्रार पत्रकार अमित शाह की अज्ञात वाहन की टक्कर से मौके पर ही मौत हो गई। लखीमपुर-सीतापुर हाईवे पर बस स्टॉप के पास हुआ यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की लापरवाही की एक और दर्दनाक मिसाल बन गया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तेज रफ्तार वाहन ने अमित शाह को ऐसी टक्कर मारी कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला। वाहन चालक मौके से फरार हो गया—जैसे हादसा नहीं, कोई मामूली गलती हो। सबसे बड़ा सवाल—क्या यह सिर्फ एक “हादसा” है? स्थानीय लोगों की मानें तो इस हाईवे पर लगा डिवाइडर और उस पर लगी जालियां किसी सुरक्षा कवच से ज्यादा “मौत का जाल” बन चुकी हैं। एक तरफ से दूसरी तरफ जाने वाला व्यक्ति यह तक नहीं देख पाता कि सामने से मौत कितनी तेजी से आ रही है।
विडंबना देखिए—हादसे रोज होते हैं, आवाजें उठती हैं, लेकिन जिम्मेदारों के कानों तक शायद ये चीखें नहीं पहुंचतीं। या फिर पहुंचती हैं और अनसुनी कर दी जाती हैं। कस्बा वासियों ने प्रशासन से बार-बार इस खतरनाक व्यवस्था को सुधारने की मांग की है, लेकिन नतीजा वही—“जैसे चल रहा है, वैसे ही चलने दो”। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर अज्ञात वाहन की तलाश शुरू कर दी है। लेकिन सवाल अब भी खड़ा है—क्या सिर्फ वाहन चालक ही दोषी है, या फिर वो सिस्टम भी जो हर हादसे के बाद सिर्फ कागजी कार्रवाई में सिमट जाता है?
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