अम्बेडकर नगर : अकबरपुर ब्लॉक में वाटर कूलर स्थापना को लेकर उठे सवाल, खर्च और प्रक्रिया पर चर्चा तेज

अम्बेडकरनगर के अकबरपुर ब्लॉक में ब्लॉक प्रमुख निधि से लगाए गए वाटर कूलरों की लागत और टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। करीब 20 स्थानों पर लगाए गए कूलरों के खर्च, बिल व पारदर्शिता को लेकर स्थानीय लोगों में चर्चा तेज हो गई है।

Mar 15, 2026 - 20:12
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अम्बेडकर नगर : अकबरपुर ब्लॉक में वाटर कूलर स्थापना को लेकर उठे सवाल, खर्च और प्रक्रिया पर चर्चा तेज

अम्बेडकरनगर, अचल वार्ता। जनपद के विकास खंड अकबरपुर में ब्लॉक प्रमुख निधि से लगाए गए वाटर कूलरों को लेकर इन दिनों क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। ग्राम पंचायत तारा खुर्द सहित करीब 20 स्थानों पर स्थापित किए गए वाटर कूलरों की लागत और प्रक्रिया को लेकर स्थानीय लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि इन वाटर कूलरों को मुख्य रूप से सरकारी विद्यालयों और साधन सहकारी समिति परिसरों में लगाया गया है, ताकि विद्यार्थियों और किसानों को गर्मी के मौसम में ठंडा पानी उपलब्ध कराया जा सके। हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि इन कूलरों की लागत को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं।

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि एक वाटर कूलर की लागत लगभग 3,88,111 रुपये दर्शाई गई है। वहीं कुछ लोगों का अनुमान है कि बोरिंग, समरसेबल पंप, पानी की टंकी, आरओ सिस्टम और अन्य फिटिंग आदि को जोड़कर इसकी संभावित लागत इससे कम हो सकती है। इसी को लेकर लोग पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि इन कार्यों को कराने वाली फर्म मे. रियल ब्रदर्स कंस्ट्रक्शन कंपनी बताई जा रही है। क्षेत्र में चर्चा है कि लगभग 20 वाटर कूलरों की स्थापना में कुल व्यय करीब 78 लाख रुपये के आसपास दर्शाया गया है। इस संबंध में स्थानीय लोग वास्तविक लागत और व्यय के बीच अंतर को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं।

कुछ लोगों का यह भी कहना है कि बिल और वाउचर में संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर तो दिखाई दे रहे हैं, लेकिन ब्लॉक प्रमुख के हस्ताक्षर या मोहर स्पष्ट रूप से नजर नहीं आ रहे हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी भी स्तर से आधिकारिक पुष्टि या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मामले को लेकर क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि यदि विकास कार्यों में किसी प्रकार की अनियमितता की आशंका है तो इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके और विकास कार्यों में पारदर्शिता बनी रहे।

फिलहाल क्षेत्र में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन से अपेक्षा कर रहे हैं कि यदि कहीं कोई गड़बड़ी है तो जांच के बाद सच्चाई सामने लाई जाए।

- हरीलाल प्रजापति 

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