भारत बन सकता है इजरायल-फिलिस्तीन शांति का अहम मध्यस्थ, फिलिस्तीनी विदेश मंत्री वारसेन आगा शाहीन का बड़ा बयान
फिलिस्तीनी विदेश मंत्री वारसेन आगा शाहीन ने भारत की संतुलित नीति की सराहना करते हुए कहा कि भारत इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष में शांति का प्रभावी मध्यस्थ बन सकता है।
नई दिल्ली, अचल वार्ता।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित इजरायल दौरे की अटकलों के बीच फिलिस्तीनी विदेश मंत्री वारसेन आगा शाहीन की भारत यात्रा ने पश्चिम एशिया की कूटनीति को नया आयाम दे दिया है। नई दिल्ली में अपने अहम दौरे के दौरान शाहीन ने भारत-फिलिस्तीन के दशकों पुराने ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित करते हुए इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष में भारत की संतुलित और निष्पक्ष भूमिका की खुलकर सराहना की।
भारत की संतुलित नीति की प्रशंसा
फिलिस्तीनी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के इजरायल और फिलिस्तीन—दोनों देशों के साथ मजबूत और सम्मानजनक संबंध हैं। यही कारण है कि भारत कब्जे और हिंसा को समाप्त करने तथा क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने में एक प्रभावशाली मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है।
दो-राष्ट्र समाधान और अंतरराष्ट्रीय कानून पर भारत का रुख
शाहीन ने अंतरराष्ट्रीय कानून, दो-राष्ट्र समाधान और न्यूयॉर्क डिक्लेरेशन के प्रति भारत के स्पष्ट और अडिग रुख की प्रशंसा की। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में फिलिस्तीन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक मान्यता मिलेगी, जिसमें भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।
भारत को बताया विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
अपनी पहली भारत यात्रा पर प्रसन्नता जताते हुए वारसेन आगा शाहीन ने भारत को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और एक सम्मानित वैश्विक शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीनी जनता भारत को ऐसा महान राष्ट्र मानती है, जो हमेशा उनके अधिकारों और संघर्षों के साथ खड़ा रहा है।
1930 के दशक से चले आ रहे भारत-फिलिस्तीन संबंध
भारत-फिलिस्तीन संबंधों के ऐतिहासिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए शाहीन ने बताया कि यह रिश्ता 1930 के दशक से चला आ रहा है। उन्होंने 1947 में फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत के समर्थन और महात्मा गांधी द्वारा फिलिस्तीन के विभाजन के विरोध को भी याद किया।
पश्चिम एशिया में स्थिरता के लिए भारत की भूमिका अहम
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारत के रणनीतिक हितों को स्वीकार करते हुए फिलिस्तीनी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की यही विशेषता उसे अलग बनाती है कि वह दोनों पक्षों से संवाद बनाए रखते हुए न्यायपूर्ण समाधान की दिशा में ठोस पहल कर सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत की सक्रिय भूमिका पूरे पश्चिम एशिया में स्थिरता लाने में निर्णायक साबित होगी।
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