अम्बेडकर नगर : बसखारी ब्लॉक में बना ‘ताजमहल गेट’, विकास नहीं कमीशन का स्मारक बना चर्चा का केंद्र
संक्षेप: बसखारी ब्लॉक अम्बेडकरनगर में बने ‘ताजमहल गेट’ पर 17 लाख रुपये खर्च होने का आरोप, स्थानीय लोगों ने उठाए भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के सवाल।
बसखारी ब्लॉक में बना ‘ताजमहल गेट’, विकास नहीं बल्कि कथित कमीशनखोरी का बना स्मारक
अम्बेडकरनगर, अचल वार्ता। विकास खंड बसखारी परिसर में बने पूर्वी गेट ने पूरे क्षेत्र में चर्चा का नया विषय छेड़ दिया है। देखने में यह गेट किसी सरकारी कार्यालय का प्रवेश द्वार कम और आगरा के ताजमहल की नकल ज्यादा प्रतीत होता है। फर्क बस इतना है कि ताजमहल प्रेम का प्रतीक है, जबकि यह गेट कथित तौर पर कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार का स्मारक बनता नजर आ रहा है।
17 लाख का ‘गेट’, सवालों के घेरे में खर्च
सूत्रों के अनुसार इस गेट के निर्माण में ग्रेनाइट पत्थर पर 6,04,255 रुपये और गेट निर्माण मद में 25,626 रुपये का भुगतान दर्शाया गया है। जबकि मजदूरी और अन्य मदों पर कितना खर्च हुआ, इसका कोई स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है। कुल मिलाकर बताया जा रहा है कि इस गेट पर करीब 17 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।
लोगों में आक्रोश, विकास नहीं ‘जेबों का विस्तार’
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी धन का भरपूर “विकास” जरूर हुआ है, लेकिन वह जनता के लिए नहीं बल्कि कुछ खास जेबों के लिए। क्षेत्रवासियों का कहना है कि जब विकासखंड कार्यालय परिसर में ही इस तरह का खर्च नजर आ रहा है, तो ग्राम पंचायतों में हुए विकास कार्यों की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जिम्मेदारी किसकी? चुप्पी पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि ब्लॉक प्रमुख, जनप्रतिनिधि और खंड विकास अधिकारी (BDO) की निगाहें इस गेट पर क्यों नहीं गईं? और अगर गईं, तो फिर जांच या आपत्ति क्यों नहीं दर्ज की गई, जबकि भुगतान की अंतिम जिम्मेदारी विकासखंड प्रशासन की ही होती है।
ग्रामीणों की सीधी टिप्पणी
क्षेत्र में चर्चा है—“अगर 17 लाख रुपये किसी एक ग्राम पंचायत में ईमानदारी से खर्च हो जाएं, तो गांव की तस्वीर बदल सकती है। लेकिन बसखारी में तो पूरा बजट सिर्फ एक गेट को ‘महान’ बनाने में लगा दिया गया।”
जांच होगी या फाइलों में दब जाएगा मामला ?
फिलहाल बसखारी विकासखंड विकास कार्यों से ज्यादा इस ‘ताजमहल गेट’ और कथित कमीशनखोरी को लेकर सुर्खियों में है। अब देखना यह होगा कि इस निर्माण पर जांच की नजर पड़ती है या फिर हर बार की तरह यह मामला भी सत्ता और सिस्टम के दबाव में दफन कर दिया जाएगा।
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