लद्दाख के हानले में दिखा लाल ऑरोरा, वैज्ञानिकों ने बताया सोलर स्टॉर्म का खतरे वाला संकेत

लद्दाख के हानले डार्क स्काई रिजर्व में दिखा खून-सा लाल ऑरोरा। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह बढ़ती सोलर एक्टिविटी का संकेत है, जो सैटेलाइट और पावर ग्रिड के लिए खतरा बन सकती है।

Jan 30, 2026 - 19:54
Feb 14, 2026 - 13:01
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लद्दाख के हानले में दिखा लाल ऑरोरा, वैज्ञानिकों ने बताया सोलर स्टॉर्म का खतरे वाला संकेत

नई दिल्ली, अचल वार्ता।

लद्दाख के हानले डार्क स्काई रिजर्व में 19 और 20 जनवरी की रातें सामान्य नहीं थीं। आमतौर पर जहां गहरे नीले आकाश में तारे और आकाशगंगाएं नजर आती हैं, वहीं इन रातों में आसमान में खून जैसा लाल ऑरोरा चमकता दिखाई दिया। यह दृश्य नॉर्दन लाइट्स जैसा था, जिसने सोशल मीडिया पर सनसनी मचा दी।

हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिर्फ एक खूबसूरत नजारा नहीं, बल्कि सूरज की बढ़ती गतिविधियों (Solar Activity) का संकेत है, जो आने वाले समय में भारत के सैटेलाइट्स, पावर ग्रिड और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए खतरा बन सकता है।

आखिर क्यों बना हानले में लाल ऑरोरा?

वैज्ञानिकों के अनुसार, ऑरोरा तब बनता है जब सूरज से निकलने वाले चार्ज्ड पार्टिकल्स पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड से टकराते हैं और वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन व नाइट्रोजन एटम्स को सक्रिय करते हैं।

आमतौर पर ध्रुवीय क्षेत्रों में ऑरोरा हरे रंग का दिखता है, लेकिन हानले जैसे कम अक्षांश वाले क्षेत्र में, करीब 300 किलोमीटर ऊंचाई पर ऑक्सीजन एटम्स सक्रिय होने से लाल रंग दिखाई देता है।

यह घटना सोलर मैक्सिमम फेज से जुड़ी मानी जा रही है, जब सूर्य की गतिविधियां चरम पर होती हैं।

सोलर स्टॉर्म से क्यों बढ़ता है खतरा?

तेज सोलर स्टॉर्म के दौरान पृथ्वी की मैग्नेटिक शील्ड सिकुड़ जाती है, जिससे सूरज की हानिकारक हवाएं सीधे प्रभाव डाल सकती हैं।

इसरो के आदित्य-एल1 मिशन ने यह दिखाया है कि जियोस्टेशनरी सैटेलाइट्स (36,000 किमी ऊंचाई पर) भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।

इसका असर:

  • सैटेलाइट्स पर ड्रैग बढ़ना
  • ऑर्बिट से बाहर होने का खतरा
  • जियोमैग्नेटिक इंड्यूस्ड करेंट्स से ट्रांसफॉर्मर जलना
  • बड़े स्तर पर ब्लैकआउट की आशंका
  • आदित्य-एल1 और हानले की अहम भूमिका

इसरो का आदित्य-एल1 मिशन सूर्य से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर L1 पॉइंट पर स्थित है और कोरोनल मास इजेक्शन (CME) को 24–48 घंटे पहले डिटेक्ट कर चेतावनी देता है।

इससे:

  • सैटेलाइट्स को सेफ मोड में डाला जा सकता है
  • पावर ग्रिड को संतुलित किया जा सकता है

वहीं हानले ऑब्जर्वेटरी (भारतीय खगोलीय वेधशाला) ग्राउंड-लेवल डेटा उपलब्ध कराती है, जो सैटेलाइट डेटा को वैलिडेट करता है। यहां जियोमैग्नेटिक करंट सेंसर्स लगाए जा रहे हैं ताकि रीयल-टाइम मॉनिटरिंग हो सके।

खूबसूरती के साथ चेतावनी

हानले का लाल आसमान 2026 की शुरुआत का एक शानदार दृश्य जरूर है, लेकिन यह इस बात का संकेत भी है कि सूरज “जाग रहा है”।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा सोलर साइकल में ऐसे तूफानों की संख्या बढ़ सकती है। ऐसे में भारत को:

स्पेस वेदर फोरकास्टिंग मजबूत करनी होगी

सैटेलाइट्स और पावर ग्रिड को अधिक सुरक्षित बनाना होगा

हानले जैसे क्षेत्रों को लाइट पॉल्यूशन से बचाना होगा, ताकि वैज्ञानिक सेंसर ठीक से काम करते रहें

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