अयोध्या: अवध साहित्य संगम की मासिक कवि गोष्ठी में कवियों ने बिखेरा काव्य रस
अयोध्या के वजीरगंज स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में अवध साहित्य संगम की मासिक कवि गोष्ठी आयोजित हुई। कवियों और शायरों ने गीत, गजल, मुक्तक व हास्य रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
वजीरगंज,अयोध्या, अचल वार्ता। हर माह के प्रथम रविवार को आयोजित होने वाली अवध साहित्य संगम की मासिक कवि गोष्ठी का आयोजन वजीरगंज स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर परिसर में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर फारूक फैजाबादी ने की, जबकि संचालन रामजीत यादव 'बेदार' ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अवधेश पाल 'बिंदास' ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत करते हुए किया। इसके बाद कवियों और शायरों ने गीत, ग़ज़ल, मुक्तक एवं हास्य रचनाओं की शानदार प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अजय मौर्या 'अलबेला' ने अपनी ग़ज़ल "खामोश है ये बहुत दिनों से कलम..." सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी। राजीव पांडे 'नादान गोंडवी' ने "वह सूरज डूबता है और मैं हूं..." के माध्यम से जीवन दर्शन को अभिव्यक्त किया। वाहिद अली 'वाहिद' ने सामाजिक सरोकारों पर आधारित रचना प्रस्तुत की, जबकि अवधेश पाल 'बिंदास' ने अपनी हास्य रचना "ऊपर से जो हंसता हूं..." से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
रविंद्र कबीर ने समकालीन परिवेश पर आधारित ग़ज़ल, राजीव 'मतवाला' ने मोहब्बत और रिश्तों पर आधारित रचना तथा रामशंकर 'रिंद' ने सामाजिक विसंगतियों पर केंद्रित मुक्तक प्रस्तुत किए। इल्तिफात 'माहिर' की ग़ज़ल "यही खलिश तो हवा के दिलों-दिमाग में है..." को श्रोताओं ने खूब सराहा।
संचालक रामजीत यादव 'बेदार' ने सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश देती अपनी रचना प्रस्तुत की, जबकि अध्यक्ष फारूक फैजाबादी ने इश्क और एहसास पर आधारित अपने अशआर सुनाकर गोष्ठी को यादगार बना दिया। रामानंद सागर ने मधुर गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को नई ऊंचाई प्रदान की।
इस अवसर पर रामायण देव वर्मा, पुष्पेंद्र, रमाशंकर तिवारी, अमित यादव, ऋतुंजय पांडे 'अगम सागर', सुगम सागर सहित अनेक साहित्यकार एवं काव्य प्रेमी उपस्थित रहे। गोष्ठी का समापन साहित्य, समाज और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ।
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