मथुरा : बरसात में मथुरा की बदहाल व्यवस्था, जलभराव से जनजीवन प्रभावित
मथुरा , अचल वार्ता । भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली एवं लीलास्थली मथुरा में बरसात का मौसम शुरू होते ही शहर की बदहाल व्यवस्थाएं एक बार फिर सामने आ गई हैं। हल्की बारिश के बाद ही शहर के प्रमुख मार्गों, कॉलोनियों और मोहल्लों में जलभराव की स्थिति बन जाती है, जिससे लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। वहीं, जिन मार्गों पर जलभराव नहीं होता, वहां भीषण ट्रैफिक जाम से लोगों को घंटों तक परेशान होना पड़ता है।
शहर के बीचों-बीच स्थित नाले आज भी सिल्ट, कीचड़ और गंदगी से लबालब भरे हुए हैं। समय रहते उनकी समुचित सफाई नहीं होने के कारण खुले नाले आम नागरिकों और पशुओं के लिए खतरा बन गए हैं। ऐसे में नगर निगम के दावे और व्यवस्थाएं धरातल पर नाकाफी साबित होती दिखाई दे रही हैं।
पिछले सप्ताह से लगातार हो रही बारिश के कारण आमजन का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। लोगों को यह तक पता नहीं होता कि वे समय पर अपने घर पहुंच पाएंगे या नहीं। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से बारिश का पानी लंबे समय तक सड़कों पर जमा रहता है, जिससे आवागमन और अधिक कठिन हो जाता है।
नए बस स्टैंड, पुराने बस स्टैंड तथा भूतेश्वर पुल के नीचे हर बारिश में गंभीर जलभराव की स्थिति बन जाती है। इन मार्गों से लोग गुजरने से बचते हैं, लेकिन मजबूरी में वैकल्पिक रास्तों पर वाहनों का दबाव बढ़ने से भारी जाम लग जाता है। ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय पुलिस के अथक प्रयासों के बावजूद 10 मिनट का सफर तय करने में एक घंटे या उससे अधिक समय लग जाता है।
इसके अलावा, शहर में सीवर लाइन और गंगाजल पाइपलाइन बिछाने के दौरान जिन सड़कों की खुदाई की गई थी, वहां बारिश के कारण सड़कें जगह-जगह धंस रही हैं और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। ये गड्ढे दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के साथ-साथ राहगीरों के लिए दुर्घटना का कारण बन सकते हैं l कुल मिलाकर, बरसात के मौसम में मथुरा की सड़कें, जलभराव, खुले नाले और बदहाल यातायात व्यवस्था आमजन के लिए गंभीर चुनौती बन गई हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि नगर निगम समय रहते नालों की सफाई, जल निकासी और सड़कों की मरम्मत पर प्रभावी कार्रवाई करे, तो हर वर्ष होने वाली इन समस्याओं से काफी हद तक राहत मिल सकती है।
- ब्यूरो रिपोर्ट
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