कुशीनगर में गन्ना फसल पर बेधक कीट का बढ़ता प्रकोप, किसानों को अलर्ट

कुशीनगर में गन्ना फसल पर अंकुर व चोटी बेधक कीट का प्रकोप बढ़ा। किसानों को समय पर नियंत्रण, कीटनाशक उपयोग और नियमित निगरानी की सलाह दी गई।

Apr 15, 2026 - 20:28
Apr 15, 2026 - 20:35
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कुशीनगर में गन्ना फसल पर बेधक कीट का बढ़ता प्रकोप, किसानों को अलर्ट

कुशीनगर गन्ना किसानों के लिए गन्ना फसल पर अंकुर एवं चोटी बेधक कीट का बढ़ता प्रकोप, समय रहते नियंत्रण जरूरी

टाप बोरर प्रबंधन के लिए विशेष कार्ययोजना लागू

कुशीनगर , अचल वार्ता । उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद में वर्तमान समय में विभिन्न चीनी मिल क्षेत्रों में गन्ने की फसल पर अंकुर बेधक एवं चोटी बेधक कीट की प्रथम पीढ़ी का प्रकोप देखा जा रहा है। गन्ना विभाग द्वारा किसानों को सतर्क करते हुए समय पर नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। जिला गन्ना अधिकारी हुदा सिद्दीकी ने बताया कि अंकुर बेधक का प्रकोप अप्रैल से जून माह तक अधिक रहता है। इस कीट की सूंडी पौधों की गोफ को खाते हुए नीचे की ओर बढ़ती है, जिससे बीच की गोफ सूख जाती है और आसानी से निकल जाती है। इसके नियंत्रण हेतु प्रभावित पौधों को सूंडी एवं प्यूपा सहित जमीन की सतह से काटकर नष्ट करें तथा गर्मी में नियमित सिंचाई एवं गुड़ाई करते रहें। रासायनिक नियंत्रण के अंतर्गत बुवाई के 45 दिन बाद फिप्रोनिल + इमिडाक्लोप्रिड (500 ग्राम/हेक्टेयर) अथवा क्लोरेंट्रानिलिप्रोल + थायोमेथाक्सम (600 ग्राम/हेक्टेयर) को 1000 लीटर पानी में मिलाकर ड्रेन्चिंग के बाद सिंचाई करना प्रभावी पाया गया है। चोटी बेधक कीट में मादा शलभ सफेद रंग की होती है, जो पत्तियों पर अंडे देती है। इसकी सूंडी पत्तियों को नुकसान पहुंचाकर गन्ने के शीर्ष भाग में “डेड हार्ट” एवं झाड़ीनुमा संरचना (बंचीटॉप) बना देती है। इसकी तीसरी पीढ़ी जून के तीसरे सप्ताह में सबसे अधिक नुकसान पहुंचाती है। उन्होंने बताया कि इसके नियंत्रण हेतु—अंडा समूहों को नष्ट करें, प्रभावित पौधों को काटकर नष्ट करें, अप्रैल के अंत या मई के अंत में क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 एससी (150 मिली/एकड़) का प्रयोग करें, जैविक नियंत्रण हेतु ट्राइकोग्रामा जापोनिकम का प्रयोग करें, खेतों में 20-30 मीटर की दूरी पर फेरोमोन ट्रैप लगाएं। गन्ना विकास विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार सहकारी गन्ना समितियों में आवश्यक कीटनाशक उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसानों को यांत्रिक एवं रासायनिक दोनों उपाय अपनाने की सलाह दी गई है, जिसमें अंडा लगी पत्तियों को तोड़ना, प्रभावित कल्लों को नष्ट करना, फेरोमोन ट्रैप लगाना एवं निर्धारित समय पर कीटनाशकों का छिड़काव करना शामिल है। किसानों से अपील की गई है कि वे अपने गन्ना खेतों की नियमित निगरानी करें तथा लक्षण दिखाई देने पर तत्काल गन्ना पर्यवेक्षक या संबंधित चीनी मिल के अधिकारियों से संपर्क करें।

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