सांड़-गांठ या सरकारी सुस्ती? 2 साल से फाइलों में कैद है पंचायतराज का 'खजाना', बाबू लोग बोले— धूल फांकने दो, फाइलें हमारी पसंदीदा हैं!
अम्बेडकरनगर अचल वार्ता/ उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जिले में भ्रष्टाचार और सरकारी कागजी कार्रवाई की सुस्ती का एक ऐसा नायाब नमूना सामने आया है, जिसे देखकर अच्छे-अच्छे जासूस भी चक्कर खा जाएं! मामला साल 2020 के त्रिस्तरीय सामान्य निर्वाचन के दौरान नियुक्त प्रशासकों और सचिवों द्वारा ग्राम पंचायतों के फंड से कथित तौर पर 'हाथ साफ करने अवैध आहरण से जुड़ा है। शिकायतकर्ता श्री शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव (निवासी बेला परसा, बसखारी ने जब जनसुनवाई पोर्टल पर आरटीआई और शिकायतों की झड़ी लगाई तो पोल खुल गई कि मई 2021 के आसपास सरकारी तिजोरी से किस तरह जमकर हाथ फेरा गया था। निर्देश यह था कि 2 साल पहले ही यानी अप्रैल 2024 में ही सभी खंड विकास अधिकारियों वीडियो और सहायक विकास अधिकारियों एडीओ पंचायत से जांच रिपोर्ट मांग ली जानी चाहिए थी। लेकिन, साहब! यहां खेल कुछ और ही है। जिला पंचायत राज अधिकारी उपेंद्र कुमार पांडेय कार्यालय से एक के बाद एक कई 'अनुस्मारक' यानी याद दिलाने वाले प्रेम पत्र जारी किए जाते रहे, पर नीचे बैठे हमारे सुस्त अधिकारी ऐसे गहरी नींद में सोए कि पिछले दो वर्ष बीत जाने के बाद भी एक इंच फाइल आगे नहीं बढ़ी। हद तो तब हो गई जब ताजा आख्या में यह अजीबोगरीब तर्क दे डाला गया कि — शिकायतकर्ता ने किसी विशेष ग्राम पंचायत का नाम ही नहीं लिखा, इसलिए जांच संभव नहीं है! जनता अब यह सोचकर हैरान है कि जब भ्रष्टाचार की खुशबू पूरे जिले में फैल रही है, तो क्या अधिकारियों की नाक तक पहुंचने के लिए भी जीपीएस (GPS) लगवाना पड़ेगा?फिलहाल, विभाग ने एक बार फिर 1सप्ताह का अल्टीमेटम देकर अपनी औपचारिकता पूरी कर ली है। अब देखना यह है कि यह फाइलों का 'धूल फांकने वाला अभियान कब तक चलता है, या फिर भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए फाइलें किसी अलमारी के अंधेरे कोने में हमेशा के लिए दफ़न हो जाती हैं!
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