जादू या सरकारी खेल, प्रधानजी को कानों-कान खबर नहीं और उड़ गए 10 लाख!

Oct 12, 2026 - 21:20
 0  66
जादू या सरकारी खेल, प्रधानजी को कानों-कान खबर नहीं और उड़ गए 10 लाख!
Photo AI generate

 कटेहरी के सारंगपुर में कागज़ों पर दौड़ गई इंटरलॉकिंग, प्रशासक सचिव मैडम और एडीओ पंचायत की जुगलबंदी' पर उठे गंभीर सवाल

     

   अम्बेडकरनगर अचल वार्ता (कटेहरी):  विकासखंड कटेहरी के ग्राम पंचायत सारंगपुर में इन दिनों विकास की ऐसी 'आंधी' आई है कि गाँव के प्रधानजी टोपी संभालते ही रह गए और कागज़ों पर करीब 10 लाख रुपये हवा में उड़ गए! जी हां गाँव में इंटरलॉकिंग सड़क बनी या नहीं, ये तो राम जाने, लेकिन पैसों का भुगतान इतनी फुर्ती से हुआ कि देखने वाले भी दांतों तले उंगली दबा लें। गाँव वालों का आरोप है कि प्रशासक के रूप में तैनात ग्राम पंचायत सचिव मांडवी उपाध्याय ने अधिकारियों की मेहरबानी से ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेला कि 10 लाख रुपये का बजट पलक झपकते ही ठिकाने लग गया। मजेदार बात यह है कि इस पूरे खेल में गाँव के चुने हुए प्रधानजी को भनक तक नहीं लगी! भुगतान का 'मायाजाल कागज़ी पन्नों पर हुए भुगतानों का लेखा-जोखा भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।होलिका दहन से हनुमान मंदिर तक: कुंज इंटरप्राइजेज को 'सेवा' के बदले मिले ₹1.65 लाख। रमेश के घर की ओर: अवध कंस्ट्रक्शन पर प्यार उमड़ा और दो किस्तों में 74,545 तथा 62हजार 611 छूमंतर हो गए। जनार्दन के घर का रास्ता यहाँ भी कागज़ी ईंटें बिछाने के नाम पर ₹74हजार 870 स्वाहा हुए। पिंटू के घर की गली- गिरजा एंटरप्राइजेज के खाते में मुस्कुराते हुए पहुँचे ₹1लाख 48हजाज 791। पुराना तजुर्बा, नया ठिकाना' मैडम का ट्रैक रिकॉर्ड! ग्रामीणों का कहना है कि सचिव मांडवी उपाध्याय के लिए ऐसे अजूबे कोई नए नहीं हैं। इससे पहले जब मैडम टांडा में तैनात थीं, तब भी सरकारी खजाने में 'सेंधमारी' का आरोप सिद्ध हुआ था और बकायदा मुकदमा तक दर्ज हुआ था। अब कटेहरी में आकर उन्होंने अपनी पुरानी कला को दोबारा निखारा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या एक अकेली सचिव इतना बड़ा खेल कर सकती हैं? ग्रामीणों के मुताबिक, बिना शह के मोहरा नहीं चलता! फाइल पर जब तक एडीओ पंचायत दुर्गा प्रसाद पांडेय और खंड विकास अधिकारी (BDO) जगन्नाथ वर्मा की 'कृपा दृष्टि' और हस्ताक्षर न हों, तब तक सरकारी खजाने की चाबी खुलना नामुमकिन है। यानी अगर गर्दन फंसी, तो नापने वाले भी कई होंगे। लीपापोती की कोशिश या होगी निष्पक्ष जांच? मामला जब तूल पकड़ने लगा और शुरुआती जांच में 'लीपापोती' की गंध आई, तो परेशान शिकायतकर्ताओं ने सीधा मुख्य विकास अधिकारी (CDO) का दरवाजा खटखटाया है। निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई गई है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी (या यूं कहें कि ईंट की ईंट और रुपये का रुपया) सामने आ सके। अब देखना यह है कि क्या इस बार भी जांच की फाइलें धूल फांकेंगी या फिर ₹10 लाख के इस 'जादुई खेल' के कलाकारों पर गाज गिरेगी गाँव की जनता तो बस यही पूछ रही है—"प्रधानजी देखते रह गए और सचिव मैडम बाजी मार गईं!

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0