लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य स्तरीय कलाकार सम्मान समारोह में की सहभागिता
77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित सरकारी आवास पर आयोजित राज्य स्तरीय कलाकार सम्मान समारोह में सहभागिता की। “विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश” अभियान के अंतर्गत कला, संस्कृति और रचनात्मक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को सम्मानित किया गया।
“विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश” अभियान के अंतर्गत कलाकारों को किया गया सम्मानित
लखनऊ, अचल वार्ता। 77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर आयोजित राज्य स्तरीय कलाकार सम्मान समारोह में सहभागिता की। यह समारोह “विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश” अभियान के अंतर्गत कला, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले कलाकारों के सम्मान हेतु समर्पित रहा।
समारोह में देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के अनेक जनपदों से पधारे कलाकारों की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने सभी कलाकारों से आत्मीय संवाद करते हुए उनकी कला-साधना, अनुभवों और रचनात्मक यात्रा के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर लोक कला, शास्त्रीय कला, नाट्य, संगीत, चित्रकला सहित विभिन्न विधाओं में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों को सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने अपने संबोधन में कहा कि कलाकार किसी भी समाज की सांस्कृतिक आत्मा होते हैं। वे अपनी सृजनशीलता के माध्यम से समाज को जोड़ने, सकारात्मक सोच को प्रेरित करने और राष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में कलाकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री जी ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सरकार कलाकारों के संरक्षण, प्रोत्साहन और कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। “विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश” की परिकल्पना में कला और संस्कृति की भूमिका केंद्रीय है, क्योंकि सांस्कृतिक समृद्धि के बिना समग्र विकास अधूरा है।
समारोह का वातावरण उत्साह, सम्मान और सांस्कृतिक गौरव से ओत-प्रोत रहा। सम्मानित कलाकारों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस अवसर को अपने जीवन का प्रेरणास्पद और स्मरणीय क्षण बताया।
- शैलेन्द्र कुमार ओझा/हरिओम तिवारी
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