लखीमपुर खीरी: करोड़ों का बजट, फिर भी गांव बदहाल: 21 दिन से बंद रास्ते में कैद 40 परिवार, प्रशासन के आश्वासन साबित हुए खोखले

Jun 7, 2026 - 21:43
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लखीमपुर खीरी: करोड़ों का बजट, फिर भी गांव बदहाल: 21 दिन से बंद रास्ते में कैद 40 परिवार, प्रशासन के आश्वासन साबित हुए खोखले

मोहम्मदी, खीरी, अचल वार्ता। एक ओर सरकार गांवों के विकास और ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर मोहम्मदी विकासखंड की ग्राम पंचायत खदैवरा में विकास के दावे धरातल पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। यहां पिछले 21 दिनों से एक सार्वजनिक रास्ता बंद पड़ा है, जिससे करीब 40 परिवारों का जीवन प्रभावित हो गया है।

  सबसे हैरानी की बात यह है कि शिकायतों, जनसुनवाई और अधिकारियों के आश्वासनों के बावजूद प्रशासन अब तक रास्ता खुलवाने में नाकाम साबित हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि 21 मई को गांव के ही एक व्यक्ति ने सार्वजनिक मार्ग पर बांस-पल्ली लगाकर रास्ता अवरुद्ध कर दिया था। इसके बाद से बच्चे स्कूल जाने के लिए मजबूरन लंबा रास्ता तय कर रहे हैं, महिलाओं को दैनिक कार्यों में परेशानी उठानी पड़ रही है और ग्रामीणों का सामान्य आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। बरसात की शुरुआत के साथ हालात और भी गंभीर हो गए हैं। 

  ग्रामीणों का सवाल है कि जब रास्ता सार्वजनिक है तो आखिर किसके संरक्षण में 21 दिनों से कब्जा बना हुआ है? यदि प्रशासन चाहता तो कुछ घंटों में रास्ता खुल सकता था, लेकिन तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है। वीरेंद्र, जीवन, राजेश्वर, रजनीश, प्रमोद, राजीव, पनिशर, अनूप, विपिन, अनिल, सुनील, रघुवीर, जयकरण, रामस्वरूप और सोनू समेत दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार अधिकारियों को लिखित शिकायत दी, मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर भी मामला दर्ज कराया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल आश्वासन ही मिले। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान प्रकाश पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पंचायत में विकास कार्यों का लाभ सीमित लोगों तक पहुंच रहा है जबकि आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। 

  ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने के बजाय अपने प्रतिनिधि पर निर्भर हैं, जिसके चलते जनहित के मुद्दे उपेक्षित पड़े हैं। जब इस संबंध में ग्राम प्रधान का पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो वह अपने आवास पर नहीं मिले। बाद में जानकारी मिली कि वह अपने प्रतिनिधि के घर पर मौजूद हैं। संपर्क करने पर उन्होंने स्वयं कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और प्रतिनिधि से बात करने को कहा। वहीं प्रतिनिधि पक्ष ने भी मामले पर कुछ भी कहने से मना कर दिया। 

  ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने तहसील समाधान दिवस में भी एसडीएम को शिकायती पत्र सौंपा था। उस समय जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया गया था, लेकिन आज तक न रास्ता खुला और न ही किसी जिम्मेदार व्यक्ति पर कार्रवाई हुई। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी और अविश्वास बढ़ता जा रहा है। 

  सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब करोड़ों रुपये के विकास बजट का दावा किया जा रहा है, तब एक सार्वजनिक रास्ता खुलवाने में प्रशासन और पंचायत व्यवस्था क्यों असहाय दिखाई दे रही है? क्या ग्रामीणों की समस्याएं केवल फाइलों और बैठकों तक सीमित रह गई हैं? 

  एसडीएम ने मामले में जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें आश्वासन नहीं, जमीन पर कार्रवाई चाहिए। ग्रामीणों ने तत्काल रास्ता खुलवाने, अवरोध पैदा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने तथा ग्राम पंचायत में कराए गए विकास कार्यों और खर्च की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की इस पीड़ा को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

- ब्यूरो रिपोर्ट 

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