भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने की हांसी और अंबाला में हुए लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा
गोहाना , अचल वार्ता। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हांसी में हुए लाठीचार्ज और टकराव की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि सरकार की कारगुजारी के चलते अंबाला में भी यही स्थिति देखने को मिली। क्योंकि बीजेपी लाठी के जोर पर सरकार चलना चाहती है, जबकि लोकतंत्र में संवाद से ही समाधान निकलता है। हर बार, हर जगह बीजेपी सरकार कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों को संभालने में पूरी तरह नाकाम साबित होती है और जानबूझकर टकराव के हालात पैदा करती है।
हांसी में हत्या की वारदात के बाद अगर सरकार तुरंत सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लेती तो ऐसे हालात पैदा नहीं होते। इसी तरह अंबाला में अगर लोगों को गाड़ी से कुचलना के आरोपियों पर तुरंत कार्रवाई होती तो वहां भी हालत नहीं बिगड़ते। लेकिन सरकार ने तत्परता और संजीदगी से अपना काम नहीं किया, जिसके चलते टकराव के हालात पैदा हुआ।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धर्मपाल मलिक के छोटे भाई जोगेंदर पाल मालिक के निधन पर शोक व्यक्त करने यहां पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने बरोदा से विधायक इंदूराज नरवाल के कार्यालय पर लोगों से मुलाकात की और पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष कमल दीवान, सांसद सतपाल मलिक उपस्तिथ थे।
हुड्डा ने बताया कि कांग्रेस कौशल कर्मियों को पक्का करने व उनकी अन्य मांगों को लेकर 19 अगस्त को बड़ा धरना-प्रदर्शन करने जा रही है। इसमें पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी, सांसद, विधायक और हजारों कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहेंगे। कांग्रेस की मांग है कि कौशल निगम के तहत लगे सभी कर्मचारियों को पक्का किया जाए और भविष्य में कच्ची भर्तियों की बजाए पक्की भर्तियां की जाएं।
गेस्ट टीचर्स के मुद्दे पर बोलते हुए हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस सरकार की पॉलिसी पर मुहर लगाते हुए कोर्ट ने गेस्ट टीचर्स के हक में फैसला दिया है। ऐसे में सरकार को भी तुरंत उन्हें पक्का करके, पक्के कर्मचारियों वाले लाभ देने चाहिए। लेकिन ऐसा करने की बजाए, सरकार कोर्ट के फैसले की अनदेखी कर रही है।
किसानों के मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि दिल्ली की तरफ कूच कर रहे किसानों को रोकने की बजाए, सरकार को उनसे संवाद करना चाहिए। किसानों को बार-बार बॉर्डर पर रोकने के हथकंडे अपनाने से समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि समाधान किसानों की मांगे मानने से निकलेगा।
हुड्डा ने कहा कि जेन-ज़ी के संघर्ष ने धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया। अगर प्रधान शुरुआत में ही नैतिक जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा दे देते तो मासूम छात्रों को ना लाठीचार्ज का सामना करने पड़ता और ना ही इतना संघर्ष करना पड़ता।
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