विभाजन की त्रासदी से सीख लेकर राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करें : प्रो. (डॉ.) कुलदीप चंद अग्निहोत्री

Aug 12, 2026 - 16:26
Aug 12, 2026 - 17:42
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विभाजन की त्रासदी से सीख लेकर राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करें : प्रो. (डॉ.) कुलदीप चंद अग्निहोत्री

राई / सोनीपत , अचल वार्ता । स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी ऑफ हरियाणा, राई में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) कुलदीप चंद अग्निहोत्री मुख्य वक्ता एवं रिसोर्स पर्सन के रूप में उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के कुलपति श्री अशोक कुमार ने प्रो. अग्निहोत्री का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत एवं अभिनंदन किया।

मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने वर्ष 1947 में हुए भारत विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उस दौरान आम नागरिकों द्वारा झेली गई भयावह परिस्थितियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विभाजन के कारण लाखों लोगों को अपने घर, जमीन और आजीविका में आछोड़कर विस्थापित होना पड़ा। हिंसा, परिवारों के बिछड़ने और अपनों को खोने की पीड़ा ने उस दौर को भारतीय इतिहास के सबसे त्रासद अध्यायों में शामिल कर दिया।

उन्होंने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल अतीत की त्रासदी को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि इतिहास से सीख लेने का दिन है। यह दिवस हमें शांति, मानवता, आपसी सम्मान, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के महत्व का संदेश देता है। विभाजन की पीड़ा को स्मरण करने का उद्देश्य किसी प्रकार की कटुता को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि ऐसी परिस्थितियों को समझना और उनसे सीख लेकर भविष्य में इस प्रकार की मानवीय त्रासदी की पुनरावृत्ति को रोकना है।

इस अवसर पर कुलपति श्री अशोक कुमार ने कहा कि विभाजन का इतिहास हमें देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सौहार्द को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को इतिहास की घटनाओं को समझते हुए शांति, भाईचारे, सहिष्णुता और राष्ट्रीय एकता के मूल्यों को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे समाज में सकारात्मक सोच, आपसी सम्मान और सद्भाव का संदेश आगे बढ़ाएं। विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान प्रदान करना ही नहीं, बल्कि उन्हें संवेदनशील, जिम्मेदार और राष्ट्र के प्रति सजग नागरिक के रूप में विकसित करना भी है। उन्होंने कहा कि इतिहास की पीड़ादायक घटनाओं का स्मरण नई पीढ़ी को मानवता और एकता के महत्व को समझने का अवसर प्रदान करता है।

कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. संदीप कुमार ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस की ऐतिहासिक एवं समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला तथा मुख्य वक्ता, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों का स्वागत किया।

कार्यक्रम में प्रो. योगेश चंदर, प्रो. अशोक कुमार, डॉ. जितेंद्र, डॉ. विवेक सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं गैर-शिक्षण कर्मचारी, प्रशिक्षक (कोच) तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। उपस्थित सभी लोगों ने वर्ष 1947 के विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों तथा विस्थापन और हिंसा की पीड़ा झेलने वाले परिवारों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।

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