अंबेडकर नगर: राशन की दुकान नहीं, जादू का मंच
अंबेडकर नगर के टांडा क्षेत्र में राशन दुकानों पर डबल कांटा तौल से गेहूं-चावल कम देने के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है।
राशन वितरण पर गंभीर आरोप, ‘डबल कांटा’ तौल से गरीबों का हक हो रहा कम
अंबेडकर नगर,अचल वार्ता। जनपद के तहसील टांडा क्षेत्र में सरकारी राशन वितरण व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। कई गांवों में राशन दुकानों पर डबल कांटा तौल के जरिए गरीबों के हिस्से का गेहूं और चावल कम दिए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं, बल्कि वर्षों से चला आ रहा खेल है।
इन इलाकों से सामने आए आरोप
बसखारी, हरैया, खसरोंपुर किछौछा, दरगाह कोतूपुर, अरूसा आजमपुर, मुजाहिदपुर जोधपुर, रुद्रपुर भगाही, मसड़ा मोहनपुर, दौलतपुर, महमूदपुर, बेला, परसा, पिपरी सैदपुर, बरी अमिया, बभनपुर, बलिया, जगदीशपुर और भराहा समेत कई गांवों के उपभोक्ताओं ने राशन कम मिलने की शिकायत की है।
ई-पॉस के बाद घोटाला हुआ हाईटेक?
ग्रामीणों का आरोप है कि ई-पॉस मशीन आने के बाद घोटाले का तरीका बदल गया है।
बताया जा रहा है कि—
- एक कांटा दिखावे के लिए ई-पॉस मशीन के सामने
- दूसरा कांटा वास्तविक वितरण के लिए
- अंगूठा लगते ही राशन का वजन घटा दिया जाता है
कई उपभोक्ताओं का यह भी आरोप है कि कुछ कोटेदार गेहूं और चावल का हिस्सा बाजार में बेच रहे हैं।
अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि जब यह समस्या लंबे समय से चली आ रही है, तो विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं है?
या फिर जानकारी होते हुए भी कार्रवाई नहीं हो रही?
लोगों का आरोप है कि सरकार मुफ्त राशन भेज रही है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर गरीबों को पूरा राशन नहीं मिल पा रहा।
जांच का आश्वासन, सवाल वही पुराने
बसखारी क्षेत्र के पूर्ति निरीक्षक से जब इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि यदि डबल कांटा तौल की शिकायत मिलती है तो मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि उपभोक्ताओं का कहना है कि यह जवाब वे वर्षों से सुनते आ रहे हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
प्रशासनिक निगरानी पर खड़े हुए सवाल
इस पूरे मामले ने सिर्फ राशन वितरण प्रणाली ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। जरूरत है कि समयबद्ध और निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि गरीबों को उनका पूरा हक मिल सके।
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