“खेत बचाओ अभियान” के तहत किसानों को मिट्टी परीक्षण, जैविक खेती और फसल प्रबंधन की दी जानकारी
कुकरा खीरी, अचल वार्ता । कृषि विज्ञान केन्द्र, जमुनाबाद लखीमपुर-खीरी द्वारा “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत विकास खंड रमियाबेहड़ के ग्राम नैनापुर में कृषक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “उर्वरकों का संतुलित उपयोग, मिट्टी की जांच की विधि और महत्व, प्राकृतिक एवं जैविक खेती की आवश्यकता, हरी खाद तथा फसल अवशेष प्रबंधन की उन्नत तकनीक” रहा।
कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक डा. प्रदीप कुमार बिसेन ने अपने संबोधन में किसानों को तकनीकी जानकारी देते हुए कहा कि मिट्टी की नियमित जांच कर उसकी संस्तुति के अनुसार पोषक तत्त्वों का प्रयोग करने से एक तरफ जहां उत्पादन लागत में कमी आती है वहीं दूसरी तरफ भूमि की उर्वरता एवं उत्पादकता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि इससे मृदा स्वास्थ्य में सुधार होता है और पर्यावरण संरक्षण में भी सहायता मिलती है।
वैज्ञानिक डा. मो. सुहेल ने हरी खाद के उपयोग के लाभों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे मिट्टी में जैविक कार्बन लाभदाई सूक्ष्म जीवों की संख्या में वृद्धि होने से पौधों में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है इसीलिए उन्होंने किसानों को फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनके वैज्ञानिक प्रबंधन की जानकारी दी जिससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होने के साथ-साथ मृदा प्रदूषण पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है। केंद्र के पशु पालन वैज्ञानिक डा. नागेन्द्र कुमार त्रिपाठी ने तकनीकी जानकारी देते हुए बताय कि बिना पशुपालन के खेती की उर्वराशक्ति तथा जैविक कार्बन को बढाना संभव ही नही है, साथ ही साथ किसान भाईयों को दुग्ध उत्पादन एवं दुग्ध व्यवसाय की नवीन तकनीक से परिचित कराया।
उन्होंने जोर दे कर कहा कि पशुओं को बिना पर्याप्त मात्रा में हरा चारा खिलाए अधिक दूध का उत्पादन संभव ही नहीं है इसलिए सफल एवं लाभदायी पशु पालन के लिए पूरे साल भर हरे चारे का उत्पादन एवं मवेशियों को खिलाना बहुत जरूरी है।
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