अम्बेडकर नगर: जांच हुई, टीम गई, रिपोर्ट बनी या दब गई? प्रतापपुर चमुर्खा मामले में फाइल की खामोशी पर बड़े सवाल

Oct 6, 2026 - 09:45
Oct 6, 2026 - 10:43
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अम्बेडकर नगर: जांच हुई, टीम गई, रिपोर्ट बनी या दब गई? प्रतापपुर चमुर्खा मामले में फाइल की खामोशी पर बड़े सवाल
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  • ₹50 हजार मीडिया, ₹1 लाख अधिकारियों के नाम पर ‘मैनेजमेंट’ की चर्चा

अम्बेडकर नगर अचल वार्ता। कटेहरी विकास खंड क्षेत्र अंतर्गत प्रतापपुर चमुर्खा मामले में जांच के बाद भी तस्वीर साफ नहीं होने से सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं। मामला केवल जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब जांच के बाद की खामोशी भी चर्चा का विषय बन गई है। बताया जा रहा है कि मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम पहुंची थी।

 टीम ने क्या देखा, क्या पाया और अपनी रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष दिया—इसकी स्पष्ट जानकारी अब तक सामने नहीं आई है। इसी बीच सूत्रों के हवाले से एक और गंभीर चर्चा सामने आई है। बताया जा रहा है कि पूरे मामले को ‘मैनेज’ करने के लिए ₹50 हजार मीडिया के नाम पर और ₹1 लाख अधिकारियों के नाम पर देने की बात कही गई थी। यानी कुल डेढ़ लाख रुपये में मामला संभालने की चर्चा होने की बात कही जा रही है। हालांकि, रकम के लेन-देन या किसी व्यक्ति को भुगतान किए जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

 यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—क्या डेढ़ लाख रुपये में मामला ‘मैनेज’ करने की कोशिश सिर्फ चर्चा थी या इसके पीछे कोई वास्तविक प्रयास भी हुआ? यदि यह केवल अफवाह है तो जिम्मेदार पक्ष सामने आकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता? और यदि जांच वास्तव में निष्पक्ष तरीके से हुई है तो उसकी रिपोर्ट और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करने में आखिर परेशानी क्या है?

जांच टीम गई तो रिपोर्ट कहां गई?

तीन सदस्यीय जांच टीम के गठन और जांच किए जाने की बात सामने आने के बाद अब निगाह जांच रिपोर्ट पर है। ग्रामीणों और शिकायत से जुड़े लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जांच पूरी होने के बाद फाइल किस अधिकारी के स्तर पर लंबित है। क्या रिपोर्ट पर निर्णय लिया जा चुका है या फिर फाइल अभी भी किसी टेबल पर कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रही है। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जांच के बाद सामान्य तौर पर शिकायतकर्ता को कार्रवाई की स्थिति की जानकारी मिलनी चाहिए। लेकिन यहां जांच के बाद भी यदि स्थिति स्पष्ट नहीं है तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठेंगे कि फाइल आगे बढ़ी या फाइल को ही आगे बढ़ने से रोक दिया गया?

मीडिया और अधिकारियों के नाम पर रकम की चर्चा ने बढ़ाई बेचैनी

सबसे गंभीर बात मीडिया और अधिकारियों के नाम पर रकम तय होने की चर्चा है। यदि किसी ने वास्तव में इस तरह की रकम की बात की है तो यह केवल प्रतापपुर चमुर्खा मामले का सवाल नहीं रह जाता, बल्कि जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न खड़ा करता है। दूसरी ओर यदि ऐसी कोई बात हुई ही नहीं तो संबंधित लोगों को सामने आकर इस चर्चा का खंडन करना चाहिए। फिलहाल ₹50 हजार मीडिया और ₹1 लाख अधिकारियों के नाम पर कथित ‘मैनेजमेंट’ की चर्चा की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं है। इसलिए यह साफ होना जरूरी है कि आखिर यह चर्चा शुरू कहां से हुई और इसके पीछे कोई तथ्य है या नहीं।

अब जवाब जांच से नहीं, कार्रवाई से चाहिए

प्रतापपुर चमुर्खा मामले में अब असली सवाल यह नहीं है कि जांच हुई या नहीं। सवाल यह है कि जांच का नतीजा क्या निकला? किसकी जिम्मेदारी तय हुई? क्या कार्रवाई की गई? यदि अनियमितता नहीं मिली तो इसकी स्पष्ट रिपोर्ट सामने क्यों नहीं रखी जा रही? और यदि गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई अब तक क्यों दिखाई नहीं दे रही है।मामले की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जांच रिपोर्ट, कार्रवाई की स्थिति और फाइल के वर्तमान स्तर को स्पष्ट किया जाना जरूरी है। क्योंकि जब जांच के बाद भी फाइल खामोश रहे और उसी दौरान डेढ़ लाख रुपये में मामला ‘मैनेज’ होने की चर्चा तैरने लगे, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। अब निगाह इस बात पर है कि प्रशासन इस कथित ‘मैनेजमेंट’ की चर्चा को अफवाह बताकर खारिज करता है या फिर इसकी तह तक जाने के लिए अलग से जांच कराता है।

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