सोशल ऑडिट कर्मचारियों ने दिया ज्ञापन , 12 अक्टूबर से काली पट्टी बांधकर करेंगे कार्य, 20 दिन में मांगें पूरी करने का अल्टीमेटम
अयोध्या , अचल वार्ता। उत्तर प्रदेश के सोशल ऑडिट विभाग में कार्यरत जिला एवं ब्लॉक सोशल ऑडिट कोऑर्डिनेटर, ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (बीआरपी), विलेज रिसोर्स पर्सन (वीआरपी) और सोशल ऑडिट टीम के अन्य कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है।
सोशल ऑडिट वेलफेयर एसोसिएशन के आह्वान पर कर्मचारी 12 अक्टूबर 2026 से हाथों में काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। वहीं, मांगों का समाधान नहीं होने पर लखनऊ में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन और रैली आयोजित करने की चेतावनी दी गई है।
इसी क्रम में अयोध्या में सोशल ऑडिट वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से जिला विकास अधिकारी को ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन में कहा गया है कि कर्मचारियों की विभिन्न न्यायोचित मांगों को लेकर लंबे समय से पत्राचार किया जा रहा है, लेकिन अब तक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। संगठन ने विभाग से मांगों पर 20 दिनों के भीतर कार्रवाई करने की अपील की है। आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप होगा।
16 वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों ने मानदेय बढ़ाने की उठाई मांग
सोशल ऑडिट कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में लंबित मानदेय और व्यावसायिक शुल्क का तत्काल भुगतान शामिल है। संगठन ने कहा है कि भुगतान में देरी से कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक कठिनाइयां पैदा होती हैं। इसके साथ ही जिला एवं ब्लॉक स्तर पर लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के मानदेय में महंगाई और अन्य संविदा कर्मचारियों के अनुरूप वृद्धि की मांग की गई है।
ज्ञापन में जिला सोशल ऑडिट कोऑर्डिनेटर (डीएसएसी) का मानदेय 50 हजार रुपये प्रतिमाह तथा ब्लॉक सोशल ऑडिट कोऑर्डिनेटर (बीएसएसी) का मानदेय 40 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित करने की मांग रखी गई है। बीआरपी और वीआरपी के मानदेय में भी महंगाई के अनुरूप वृद्धि करने की मांग की गई है।
स्पष्ट एचआर नीति और सेवा सुरक्षा की मांग
कर्मचारियों ने सोशल ऑडिट विभाग में पारदर्शी मानव संसाधन (एचआर) नीति लागू करने की मांग की है। इसमें सेवा सुरक्षा, पदोन्नति, स्थानांतरण, अवकाश, अनुशासनात्मक प्रक्रिया और अन्य सेवा शर्तों का स्पष्ट प्रावधान शामिल करने की मांग की गई है। इसके अलावा बीआरपी के भुगतान की प्रक्रिया को ऑडिट समाप्त होने तक पूरा करते हुए बीएसएसी की तरह नियमित मासिक भुगतान सुनिश्चित करने तथा सोशल ऑडिट टीम के सदस्यों से लगातार कार्य लिए जाने की मांग की गई है।
आठ लाख रुपये के स्वास्थ्य बीमा की मांग
सभी सोशल ऑडिट कर्मचारियों को न्यूनतम आठ लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों को यात्रा और कार्य के दौरान विभिन्न परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में स्वास्थ्य सुरक्षा और बीमा की सुविधा आवश्यक है। कर्मचारियों ने फील्ड कार्य की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यात्रा भत्ता और अन्य दैनिक भत्तों में भी उचित वृद्धि की मांग की है।
दुर्घटना में सहायता और मृतक आश्रितों को नियुक्ति देने की मांग
सोशल ऑडिट कर्मचारियों ने ड्यूटी के दौरान दुर्घटना होने पर आवश्यक सहायता और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग उठाई है। ज्ञापन में कहा गया है कि ड्यूटी के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिजनों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति देने की व्यवस्था की जाए।
इसके साथ ही भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के संबंधित शासनादेशों के अनुरूप चिकित्सा एवं अनुकंपा संबंधी सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
वर्ष 2022 की व्यवस्था बहाल करने सहित कई मांगें
कर्मचारियों ने ब्लॉक स्तर पर कार्यरत कर्मियों की नियुक्ति और ड्यूटी व्यवस्था में वर्ष 2022 की व्यवस्था बहाल करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त बीआरपी और सोशल ऑडिट टीम के सदस्यों की उम्र सीमा संविदा कर्मियों के अनुरूप निर्धारित करने तथा प्रदेश में लंबे समय से रिक्त बीएसएसी पदों पर चयन प्रक्रिया शीघ्र शुरू कराने की मांग की गई है।
ज्ञापन में जिला एवं ब्लॉक स्तर के कर्मचारियों को लैपटॉप, एंड्रॉयड डिवाइस और इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी शामिल है, ताकि योजनाओं के प्रचार-प्रसार और विभागीय कार्यों को सुचारु रूप से पूरा किया जा सके।
संगठन ने जिला स्तर पर स्टेशनरी भुगतान में पारदर्शिता लाने, संबंधित भुगतान समय से कराने तथा लंबे समय से तैनात कोऑर्डिनेटरों के नवीनीकरण के नाम पर कथित रूप से अधिक धनराशि वसूले जाने की समस्या का समाधान करने की मांग भी उठाई है। इसके अलावा निदेशालय में सलाहकार और एमएसईसी के पदों पर अनुभवी डीएसएसी एवं बीएसएसी कर्मियों को अवसर देने की मांग की गई है।
लखनऊ में धरना-प्रदर्शन की तैयारी
सोशल ऑडिट कर्मचारियों ने कहा कि 12 अक्टूबर 2026 से सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक हाथों में काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि कर्मचारियों की मांगों पर शासन स्तर से सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा। कर्मचारियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे बढ़ाया भी जा सकता है ।
अब देखना होगा कि सोशल ऑडिट कर्मचारियों की लंबित मांगों पर शासन और विभागीय अधिकारी क्या कदम उठाते हैं तथा कर्मचारियों को मानदेय, सेवा सुरक्षा, स्वास्थ्य बीमा और अन्य सुविधाओं के संबंध में राहत मिलती है या संगठन के कर्मचारी आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
ज्ञापन देने वालों में वन्दना देवी DSAC, तौकीर अहमद BSAC रुदौली, संध्या सिंह BSAC बीकापुर, सुषमा BSAC एवं राजेश त्रिपाठी, रामनरेश, गुरुदत्त सिंह,सुरेश यादव, शैलेन्द्र ओझा, कर्मेंद्र पाण्डे,राकेश मिश्रा, संतोष मिश्रा आदि BRP मौजूद रहे।
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