मनरेगा बचाओ संग्राम: सोनिया गांधी का मोदी सरकार पर हमला, योजना को कमजोर करने का आरोप
मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान के तहत सोनिया गांधी ने वीडियो जारी कर मोदी सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया। जानिए 45 दिवसीय कांग्रेस अभियान की पूरी जानकारी।
नई दिल्ली ,अचल वार्ता। कांग्रेस की चेयरपर्सन और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया है। ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ अभियान के तहत मंगलवार को जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि यह कानून गरीबों, बेरोजगारों और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा करता है, लेकिन बीते 11 वर्षों में सरकार ने इस ऐतिहासिक योजना पर बुलडोजर चला दिया है।
मनरेगा गरीबों के लिए सुरक्षा कवच था—सोनिया गांधी
सोनिया गांधी ने कहा कि करीब 20 वर्ष पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में संसद ने सर्वसम्मति से मनरेगा कानून पारित किया था। यह कानून ग्रामीण भारत के लिए क्रांतिकारी साबित हुआ, जिसने करोड़ों परिवारों को रोजगार का कानूनी अधिकार दिया और बड़े पैमाने पर पलायन को रोका।
उन्होंने कहा कि मनरेगा ने सिर्फ आजीविका ही नहीं दी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती भी प्रदान की।
दिल्ली से तय हो रहा है गांवों का रोजगार
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने बिना किसी सलाह-मशविरे के मनरेगा कानून में मनमाने बदलाव किए। अब यह तय किया जा रहा है कि किसे, कितना और कहां रोजगार मिलेगा—और यह फैसले दिल्ली में बैठकर किए जा रहे हैं, जो जमीनी सच्चाई से कोसों दूर हैं।
उन्होंने कहा कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना सिर्फ शुरुआत थी, असल में पूरी योजना को कमजोर कर दिया गया है।
मनरेगा पार्टी नहीं, देशहित का मुद्दा
कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि मनरेगा कांग्रेस की देन जरूर है, लेकिन यह कभी पार्टी का मुद्दा नहीं रहा। यह देश के किसानों, भूमिहीन मजदूरों और गरीब परिवारों से जुड़ा जनहित का कानून है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा को कमजोर करना करोड़ों गरीबों पर सीधा हमला है और इसका डटकर मुकाबला किया जाएगा।
45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान का ऐलान
कांग्रेस का ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ अभियान 10 जनवरी से शुरू होकर 25 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान पार्टी देशभर में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन, विधानसभा घेराव, पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान और ‘काम मांगो अभियान’ चलाएगी।
सोनिया गांधी ने कहा कि 20 साल पहले गरीबों को रोजगार का अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष किया था और अब इस “काले कानून” के खिलाफ भी पूरी मजबूती से लड़ाई लड़ी जाएगी।
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