मथुरा डीआईओएस कार्यालय पर अनियमित भुगतान के आरोप

मथुरा जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में वेतन और अन्य बिलों के अनियमित भुगतान के आरोपों के बाद शासन स्तर पर गहन जांच की मांग उठी है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जांच होने पर बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आ सकता है।

May 10, 2026 - 06:12
May 10, 2026 - 12:19
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मथुरा डीआईओएस कार्यालय पर अनियमित भुगतान के आरोप

मथुरा , अचल वार्ता । प्रदेश के पीलीभीत जिला में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में कम्प्यूटर पर वेतन बिल बना कर करोड़ो रुपए का अनियमित वेतन व अन्य बिलो का भुगतान का बड़ा मेटर के खुलासे के बाद योगी सरकार की नींद खुली है पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का झूठा निस्तारण का यदि समय रहते मुख्यमंत्री कार्यालय संज्ञान ले लेता तो सरकार ओर माध्यमिक शिक्षा विभाग की छवि खराब होने से बच सकती थी । 

मथुरा में भी अनियमित वेतन व अन्य बिलो के भुगतान की शासन स्तर से जांच हो तो पीलीभीत से भी बड़ा मेटर सामने आ सकता हैं पीलीभीत प्रकरण से मुख्यमंत्री कार्यालय की आखे खुलने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए पूरे प्रदेश में जांच कराने के आदेश जारी किए।

  रचना जयसवाल अनुसचिव उत्तर प्रदेश शासन ने डा महेंद्र देव शिक्षा निदेशक माध्यमिक को कड़ा पत्र जारी करते हुए गहरी नाराज़गी प्रकट करते हुए पूरे प्रदेश के जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में अनियमित वेतन व अन्य बिलो के भुगतान की जांच कराने के निर्देश दिए। डॉ महेंद्र देव शिक्षा ने प्रदेश के सभी सयुक्त शिक्षा निदेशक को पत्र निर्गत करते हुए आदेश दिया की वह अपने मंडल के सभी जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में वेतन व अन्य बिलो आहरण से संबंधित संवेदनशील कार्यों की गहनता जांच कर दोषी अधिकारी व कर्मचारी का नाम सहित उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव निदेशालय को भेजे ।

जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय मथुरा की अनियमित वेतन भुगतान व अन्य बिलो के आहरण के संबध मे पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत संदर्भ संख्या 40014526007725 वु 40014526011633 का जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा द्वारा फर्जी निस्तारण कर दिया गया जबकि एक अन्य अनियमित वेतन भुगतान आहरण के संबध में पोर्टल पर दर्ज शिकायत संदर्भ संख्या 60000260046964 का अभी तक निस्तारण नहीं करने से जांच अधिकारियों पर उंगली उठने लगी है सर क्योंकि उक्त शिकायत में विभाग के अधिकारी स्वयं फंस रहे है

  मजे की बात यह है कि इस प्रकरण में जांच अधिकारी यशपाल सिंह सह जिला विद्यालय निरीक्षक ओर शैलेंद्र कुमार सिंह वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक जो इस कार्यालय में संबद्ध हैं ओर उनके द्वारा ही अनियमित वेतन भुगतान किया जा रहा है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने मदन सिंह वनाम हरियाणा मे स्पष्ट कहा है कि बिना विज्ञापन या बिना साक्षात्कार के रखे कार्मिकों का विनियमित कारण नहीं किया जा सकता हैं। यह शिकायत इसी संदर्भ में की गई थी 

जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा कार्यालय रवींद्र सिंह के समय के अनियमित वेतन भुगतान व अन्य बिलो आहरण की जांच करा ली जाए तो पीलीभीत से भी बड़ा मेटर सामने आ सकता है

जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा कार्यालय में संबद्ध है लेखाधिकारी, सह जिला विद्यालय निरीक्षक ओर कम्पूटर पर वेतन बिल पटल सहायक 

जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा कार्यालय में तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा रवींद्र सिंह ने नियम विरुद्ध कार्य को करने के लिए अपने चहते लोगों को उच्चाधिकारियों गलत जानकारी देते हुए संबद्ध कर अनियमित वेतन भुगतान व अन्य बिलो का जमकर मनमानी कर भुगतान किया गया था क्योंकि इनके समय कंप्यूटर पर वेतन बिल बनाने वाला पटल सहायक अनुज चौधरी, शैलेन्द्र कुमार सिंह वित्त एवं लेखाधिकारी एवं यशपाल सिंह सह जिला विद्यालय निरीक्षक तीनों ही इस कार्यालय में संबद्ध है इन तीनो की मूल तैनाती अन्य स्थलों पर है अनुज चौधरी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में, यशपाल सिंह राजकीय इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य है तो वही शैलेन्द्र कुमार सिंह वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक मथुरा में मूल तैनाती है।  

सयुक्त शिक्षा निदेशक आगरा की भी भूमिका संदिग्ध 

लगातार मुख्यमंत्री पोर्टल पर की जा रही शिकायतों के झूठा निस्तारण पर विशेष काज के अतर्गत स्वीकृत किया जाते थे अब देखने वाली बात यह होंगी कि मुकेश अग्रवाल सयुक्त शिक्षा निदेशक आगरा जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा कार्यालय में अनियमित वेतन व अन्य बिलो के भुगतान आहरण पर कितनी गहनता से जांच कर दोषी अधिकारी व कर्मचारी के नाम सहित उनके खिलाफ कार्यवाही का प्रस्ताव निदेशालय को भेजते है या प्रकरण पर माहौल शांत होने का इंतजार करेंगे। जबकि शासन स्तर पर गोपनीय रूप से मॉनिटरिंग की जा रही हैं वह दिखावा तो नहीं है करोड़ो रुपए का अनियमित वेतन व अन्य बिलो का भुगतान का बड़ा मेटर के खुलासे के बाद योगी सरकार की नींद खुली है पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का झूठा निस्तारण का यदि समय रहते मुख्यमंत्री कार्यालय संज्ञान ले लेता तो सरकार ओर माध्यमिक शिक्षा विभाग की छवि खराब होने से बच सकती थी

मथुरा में भी अनियमित वेतन व अन्य बिलो के भुगतान की शासन स्तर से जांच हो तो पीलीभीत से भी बड़ा मेटर सामने आ सकता हैं पीलीभीत प्रकरण से मुख्यमंत्री कार्यालय की आखे खुलने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए पूरे प्रदेश में जांच कराने के आदेश जारी किए। रचना जयसवाल अनुसचिव उत्तर प्रदेश शासन ने डा महेंद्र देव शिक्षा निदेशक माध्यमिक को कड़ा पत्र जारी करते हुए गहरी नाराज़गी प्रकट करते हुए पूरे प्रदेश के जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में अनियमित वेतन व अन्य बिलो के भुगतान की जांच कराने के निर्देश दिए। डॉ महेंद्र देव शिक्षा ने प्रदेश के सभी सयुक्त शिक्षा निदेशक को पत्र निर्गत करते हुए आदेश दिया की वह अपने मंडल के सभी जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में वेतन व अन्य बिलो आहरण से संबंधित संवेदनशील कार्यों की गहनता जांच कर दोषी अधिकारी व कर्मचारी का नाम सहित उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव निदेशालय को भेजे ।

जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय मथुरा की अनियमित वेतन भुगतान व अन्य बिलो के आहरण के संबध मे पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत संदर्भ संख्या 40014526007725 व 40014526011633 का जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा द्वारा फर्जी निस्तारण कर दिया गया जबकि एक अन्य अनियमित वेतन भुगतान आहरण के संबध में पोर्टल पर दर्ज शिकायत संदर्भ संख्या 60000260046964 का अभी तक निस्तारण नहीं करने से जांच अधिकारियों पर उंगली उठने लगी है क्योंकि उक्त शिकायत में विभाग के अधिकारी स्वयं फंस रहे है मजे की बात यह है कि इस प्रकरण में जांच अधिकारी यशपाल सिंह सह जिला विद्यालय निरीक्षक ओर शैलेंद्र कुमार सिंह वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक जो इस कार्यालय में संबद्ध हैं ओर उनके द्वारा ही अनियमित वेतन भुगतान किया जा रहा है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने मदन सिंह वनाम हरियाणा मे स्पष्ट कहा है कि बिना विज्ञापन या बिना साक्षात्कार के रखे कार्मिकों का विनियमित कारण नहीं किया जा सकता हैं। यह शिकायत इसी संदर्भ में की गई थी 

जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा कार्यालय रवींद्र सिंह के समय के अनियमित वेतन भुगतान व अन्य बिलो आहरण की जांच करा ली जाए तो पीलीभीत से भी बड़ा मेटर सामने आ सकता हैं

जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा कार्यालय में संबद्ध है लेखाधिकारी, सह जिला विद्यालय निरीक्षक ओर कम्पूटर पर वेतन बिल पटल सहायक 

जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा कार्यालय में तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा रवींद्र सिंह ने नियम विरुद्ध कार्य को करने के लिए अपने चहते लोगों को उच्चाधिकारियों गलत जानकारी देते हुए संबद्ध कर अनियमित वेतन भुगतान व अन्य बिलो का जमकर मनमानी कर भुगतान किया गया था क्योंकि इनके समय कंप्यूटर पर वेतन बिल बनाने वाला पटल सहायक अनुज चौधरी, शैलेन्द्र कुमार सिंह वित्त एवं लेखाधिकारी एवं यशपाल सिंह सह जिला विद्यालय निरीक्षक तीनों ही इस कार्यालय में संबद्ध है इन तीनो की मूल तैनाती अन्य स्थलों पर है अनुज चौधरी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में, यशपाल सिंह राजकीय इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य है तो वही शैलेन्द्र कुमार सिंह वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक मथुरा में मूल तैनाती है।  

सयुक्त शिक्षा निदेशक आगरा की भी भूमिका संदिग्ध 

लगातार मुख्यमंत्री पोर्टल पर की जा रही शिकायतों के झूठा निस्तारण पर विशेष काज के अतर्गत स्वीकृत किया जाते थे अब देखने वाली बात यह होंगी कि मुकेश अग्रवाल सयुक्त शिक्षा निदेशक आगरा जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा कार्यालय में अनियमित वेतन व अन्य बिलो के भुगतान आहरण पर कितनी गहनता से जांच कर दोषी अधिकारी व कर्मचारी के नाम सहित उनके खिलाफ कार्यवाही का प्रस्ताव निदेशालय को भेजते है या प्रकरण पर माहौल शांत होने का इंतजार करेंगे। जबकि शासन स्तर पर गोपनीय रूप से मॉनिटरिंग की जा रही हैं वह दिखावा तो नहीं है

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